उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए जुलाई की शुरुआत राहत भरी खबर लेकर आई है। राज्य में ईंधन अधिभार समायोजन (Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge-FPPAS) में कमी किए जाने के बाद जुलाई महीने में बिजली की प्रभावी दरें 4.43 प्रतिशत तक कम हो गई हैं। इसका सीधा फायदा घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिल में मिलेगा।
यह राहत उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के फैसले के बाद संभव हुई है। आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों द्वारा प्रस्तुत ईंधन और बिजली खरीद लागत के आंकड़ों की समीक्षा की। जांच में लागत कम पाए जाने के बाद आयोग ने ईंधन अधिभार में कटौती को मंजूरी दे दी। माना जा रहा है कि आयोग के सख्त रुख और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की लगातार मांगों का भी इस फैसले में अहम योगदान रहा।
क्या होता है FPPAS?
FPPAS यानी फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज वह शुल्क है, जिसे बिजली उत्पादन और खरीद में आने वाली वास्तविक लागत के आधार पर हर महीने समायोजित किया जाता है। यदि बिजली बनाने या खरीदने की लागत बढ़ती है तो यह शुल्क उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ जाता है, जबकि लागत कम होने पर इसे घटा दिया जाता है। इस बार बिजली कंपनियों की लागत में कमी आने से इसका लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है।
बिजली बिल पर कितना पड़ेगा असर?
जुलाई महीने के लिए लागू 4.43 प्रतिशत की कमी का मतलब यह नहीं है कि बिजली की मूल दरें बदली हैं, बल्कि ईंधन अधिभार कम होने से कुल बिल में राहत मिलेगी। किसी उपभोक्ता को कितनी बचत होगी, यह उसकी बिजली खपत और बिल की राशि पर निर्भर करेगा। ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत अधिक राहत मिलेगी।
उपभोक्ता परिषद की लंबे समय से थी मांग
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद लगातार यह मुद्दा उठाती रही है कि जब बिजली कंपनियों की ईंधन और खरीद लागत घटती है, तो उसका लाभ समय पर उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए। परिषद का कहना था कि यदि लागत बढ़ने पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है, तो लागत कम होने पर उसी अनुपात में राहत भी दी जानी चाहिए। आयोग के ताजा फैसले को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
किन उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा?
इस फैसले का लाभ प्रदेश के घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक, कृषि और अन्य श्रेणी के सभी बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के दौर में बिजली बिल में मिलने वाली यह राहत आम लोगों के घरेलू बजट पर सकारात्मक असर डालेगी। छोटे कारोबारियों और उद्योगों को भी बिजली खर्च में कुछ कमी का फायदा मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली दरों में पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक लागत के आधार पर समय-समय पर ईंधन अधिभार की समीक्षा करना उपभोक्ताओं के हित में है। जुलाई में मिली यह 4.43 प्रतिशत की राहत इसी प्रक्रिया का परिणाम है और इससे यह संदेश भी जाता है कि नियामक व्यवस्था सक्रिय रहने पर बिजली उपभोक्ताओं को लागत में कमी का सीधा लाभ मिल सकता है।
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