राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: इंजीनियर से पूछताछ तेज, पांच साल के ऑडिट की सिफारिश; खुल सकते हैं कई बड़े राज


 अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित हेरफेर और चोरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में कमीशनखोरी के आरोप लगाने वाले इंजीनियर से जांच एजेंसियां लगातार पूछताछ कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर सकते हैं।

मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने पिछले पांच वर्षों में मंदिर को प्राप्त हुए चढ़ावे का व्यापक ऑडिट कराने की सलाह दी है। जांच टीम का मानना है कि पुराने रिकॉर्ड की गहन समीक्षा से वित्तीय लेनदेन में संभावित अनियमितताओं और गड़बड़ियों का पता लगाया जा सकता है।

रिपोर्ट में केवल ऑडिट की सिफारिश ही नहीं की गई है, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए भी कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा और निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उपाय शामिल बताए जा रहे हैं। अब इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।

इस बीच मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। धर्मसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष दुबे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यदि चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं तो इसकी निष्पक्ष और व्यापक जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच एजेंसियों की सक्रियता और एसआईटी की सिफारिशों के बाद आने वाले दिनों में इस मामले में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यदि पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड का ऑडिट कराया जाता है, तो मंदिर प्रशासन और चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और जांच की आगे की दिशा पर टिकी हुई हैं।

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