अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि हालिया संघर्षों और सैन्य दबाव के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और उसके पास पहले की तुलना में केवल 21 से 22 प्रतिशत मिसाइलें ही बची हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि तेहरान फिलहाल परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में नहीं है।
ट्रंप के अनुसार, हाल के घटनाक्रमों ने ईरान के सैन्य ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिससे उसकी रणनीतिक क्षमता कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइल शक्ति में आई गिरावट क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है और इससे उसकी सैन्य आक्रामकता पर भी असर पड़ा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पहले की तुलना में काफी पीछे चला गया है। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में तेहरान के लिए परमाणु हथियार तैयार करना संभव नहीं दिखता। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह आकलन किन खुफिया या सैन्य रिपोर्टों के आधार पर किया गया है।
ट्रंप के बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की वास्तविक सैन्य और परमाणु क्षमता का आकलन स्वतंत्र एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर ही किया जा सकता है। वहीं, ईरान पहले भी अपने रक्षा कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के दावों को खारिज करता रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और मिसाइल विकास जैसे मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी है। ऐसे में ट्रंप का यह ताजा बयान एक बार फिर पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर बहस का विषय बन गया है।
हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि तेहरान इन आरोपों और दावों का क्या जवाब देता है तथा क्षेत्र में आगे की रणनीतिक स्थिति किस दिशा में बढ़ती है।
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