जी-7 सम्मेलन की शुरुआत, इस बार की बैठक क्यों खास? किस सदस्य देश से ट्रंप का कब हुआ विवाद, जानिए


 फ्रांस के एवियां-ले-बैं (Évian-les-Bains) में 15 से 17 जून तक जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है। दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब यूक्रेन युद्ध, ईरान संकट, वैश्विक व्यापार तनाव और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं।

इस बार का सम्मेलन कई वजहों से खास माना जा रहा है। पहली वजह अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की वापसी है, जो अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार पूर्ण जी-7 शिखर बैठक में शामिल हो रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान को लेकर हालिया घटनाक्रम, यूक्रेन युद्ध और टैरिफ विवादों ने सम्मेलन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

G7 में कौन-कौन हैं?

जी-7 समूह में United States, Canada, United Kingdom, France, Germany, Italy और Japan शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ भी बैठकों में भाग लेता है।

ट्रंप का किन देशों से हुआ विवाद?

कनाडा: 2018 के जी-7 सम्मेलन के दौरान ट्रंप और तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री Justin Trudeau के बीच टैरिफ को लेकर तीखा विवाद हुआ था। ट्रंप ने ट्रूडो की आलोचना करते हुए उन्हें "कमजोर" और "बेईमान" तक कहा था।

फ्रांस: ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron के बीच व्यापार, जलवायु नीति और हालिया अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर कई बार मतभेद सामने आए हैं। पिछले वर्ष ट्रंप ने मैक्रों पर सार्वजनिक टिप्पणी भी की थी।

जर्मनी और यूरोपीय सहयोगी: टैरिफ, यूक्रेन नीति और ईरान से जुड़े मुद्दों पर ट्रंप की नीतियों को लेकर कई यूरोपीय देशों ने असहमति जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, इस बार भी कई नेता उनसे कठिन सवाल पूछ सकते हैं।

जापान: ट्रंप और जापान के नेताओं के बीच व्यापार एवं सुरक्षा मामलों को लेकर अतीत में बयानबाजी देखने को मिली थी, हालांकि दोनों देशों के रणनीतिक संबंध मजबूत बने रहे।

सम्मेलन से क्या उम्मीद?

जी-7 नेताओं की चर्चा का केंद्र यूक्रेन युद्ध, ईरान के साथ संभावित समझौता, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा रहने वाली है। इसके अलावा भारत समेत कई आमंत्रित देशों के नेताओं के साथ भी अलग-अलग बैठकें प्रस्तावित हैं।

दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जी-7 देश मौजूदा वैश्विक संकटों पर साझा रणनीति बनाने में सफल होते हैं या फिर सदस्य देशों के बीच मतभेद हावी रहते हैं।

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