उत्तराखंड संवाद 2026 कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश की एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यूसीसी केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने देश के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान अवसर सुनिश्चित करने का सपना देखा था, जिसे पूरा करने के लिए यूसीसी एक आवश्यक कदम है।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जिसने समान नागरिक संहिता को लागू करने का साहसिक निर्णय लिया। इससे समाज में समानता, न्याय और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूसीसी किसी धर्म, समुदाय या परंपरा के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार प्रदान करने का माध्यम है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण के सिद्धांतों पर कार्य कर रही है। राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, निवेश को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन और पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
धामी ने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार और नकल माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। युवाओं के हितों की रक्षा के लिए कठोर कानून बनाए गए हैं, जिससे सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को विकास के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। उन्होंने नागरिकों से विकास और सामाजिक सुधारों की इस यात्रा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि यूसीसी के माध्यम से समानता और न्याय पर आधारित समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा, जो राष्ट्र को और अधिक मजबूत तथा एकजुट बनाएगा। यही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का वास्तविक स्वरूप है।

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