भारतीय सेना के निवर्तमान प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की सुरक्षा, चीन के साथ सीमा पर हालात, भविष्य की सैन्य रणनीति और अग्निपथ योजना को लेकर कई अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हर साल 1100 से अधिक बार जमीनी स्तर पर बातचीत होती है। इन बैठकों का उद्देश्य सीमा पर शांति बनाए रखना, तनाव कम करना और किसी भी तरह की गलतफहमी को समय रहते दूर करना होता है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि एलएसी की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन इसे पूरी तरह सामान्य नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर संवेदनशीलता अब भी बनी हुई है, इसलिए भारतीय सेना लगातार सतर्क है और हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहती है। उनका कहना था कि भारत की प्राथमिकता हमेशा सीमा पर शांति बनाए रखना रही है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उनके मुताबिक इस अभियान ने सेना की क्षमता, समन्वय और आधुनिक युद्ध कौशल को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक तरीकों से अलग होंगे, इसलिए भारतीय सेना तेजी से तकनीक आधारित सैन्य ढांचे की ओर बढ़ रही है। आधुनिक हथियारों, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं और उन्नत निगरानी प्रणालियों को सेना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है।
जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल को देखते हुए भारतीय सेना अपने प्रशिक्षण, संसाधनों और रणनीतियों में लगातार बदलाव कर रही है। उनका मानना है कि भविष्य में वही सेना प्रभावी होगी, जो तकनीक, गति और सटीकता के साथ काम करेगी।
अग्निपथ योजना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह भारतीय सेना को युवा, ऊर्जावान और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस योजना से सेना में नई सोच, आधुनिक कौशल और बेहतर दक्षता आएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे सैन्य सेवा के दौरान और उसके बाद भी देश के लिए उपयोगी भूमिका निभा सकें।
जनरल द्विवेदी के मुताबिक भारतीय सेना केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना नहीं कर रही, बल्कि भविष्य के तकनीक-आधारित युद्धों की तैयारी भी पूरी मजबूती के साथ कर रही है। सीमा सुरक्षा, आधुनिक सैन्य क्षमता और रणनीतिक सुधारों के जरिए भारत अपनी रक्षा व्यवस्था को लगातार और अधिक मजबूत बना रहा है।भारतीय सेना के निवर्तमान प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की सुरक्षा, चीन के साथ सीमा पर हालात, भविष्य की सैन्य रणनीति और अग्निपथ योजना को लेकर कई अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हर साल 1100 से अधिक बार जमीनी स्तर पर बातचीत होती है। इन बैठकों का उद्देश्य सीमा पर शांति बनाए रखना, तनाव कम करना और किसी भी तरह की गलतफहमी को समय रहते दूर करना होता है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि एलएसी की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन इसे पूरी तरह सामान्य नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पर संवेदनशीलता अब भी बनी हुई है, इसलिए भारतीय सेना लगातार सतर्क है और हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहती है। उनका कहना था कि भारत की प्राथमिकता हमेशा सीमा पर शांति बनाए रखना रही है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उनके मुताबिक इस अभियान ने सेना की क्षमता, समन्वय और आधुनिक युद्ध कौशल को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक तरीकों से अलग होंगे, इसलिए भारतीय सेना तेजी से तकनीक आधारित सैन्य ढांचे की ओर बढ़ रही है। आधुनिक हथियारों, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं और उन्नत निगरानी प्रणालियों को सेना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है।
जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल को देखते हुए भारतीय सेना अपने प्रशिक्षण, संसाधनों और रणनीतियों में लगातार बदलाव कर रही है। उनका मानना है कि भविष्य में वही सेना प्रभावी होगी, जो तकनीक, गति और सटीकता के साथ काम करेगी।
अग्निपथ योजना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह भारतीय सेना को युवा, ऊर्जावान और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस योजना से सेना में नई सोच, आधुनिक कौशल और बेहतर दक्षता आएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे सैन्य सेवा के दौरान और उसके बाद भी देश के लिए उपयोगी भूमिका निभा सकें।
जनरल द्विवेदी के मुताबिक भारतीय सेना केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना नहीं कर रही, बल्कि भविष्य के तकनीक-आधारित युद्धों की तैयारी भी पूरी मजबूती के साथ कर रही है। सीमा सुरक्षा, आधुनिक सैन्य क्षमता और रणनीतिक सुधारों के जरिए भारत अपनी रक्षा व्यवस्था को लगातार और अधिक मजबूत बना रहा है।

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