West Asia Tension: शांति की उम्मीदों के बीच फिर भड़का ईरान-अमेरिका तनाव, PAK-UAE के बदले तेवरों ने बढ़ाई चिंता


 पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। बीते कुछ दिनों से ईरान और अमेरिका के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी और संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ रही थीं, लेकिन अब ताजा घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र को नए तनाव की ओर धकेल दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा दक्षिणी ईरान में की गई सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गया है।

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के कुछ रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए सीमित सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया। हालांकि वॉशिंगटन ने इसे सुरक्षा से जुड़ी “रक्षात्मक कार्रवाई” बताया है, लेकिन तेहरान ने इसे सीधा उकसावा करार दिया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसी कार्रवाइयां जारी रहीं तो जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा। इस बयान के बाद पूरे इलाके में तनाव और बढ़ गया है।

स्थिति को और जटिल पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के बदले रुख ने बना दिया है। पाकिस्तान ने हाल के दिनों में पश्चिम एशिया के मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है और कई कूटनीतिक बैठकों में ईरान के पक्ष में नरम रुख दिखाया है। वहीं UAE ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता जाहिर करते हुए बड़े देशों से संयम बरतने की अपील की है। दोनों देशों की सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों को और संवेदनशील बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था भी इसकी चपेट में आ सकती है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियां दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का कारण बन रही हैं।

फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हैं। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन जमीनी हालात बता रहे हैं कि एक छोटी चूक भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकती है।

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