संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में पहली बार इस्राइली और रूसी बलों पर संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा के गंभीर आरोप लगाए गए हैं और उन्हें ब्लैकलिस्ट में शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध और संघर्ष प्रभावित इलाकों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं को लेकर कई शिकायतें दर्ज की गई थीं। जांच के बाद संयुक्त राष्ट्र ने कुछ इस्राइली और रूसी सैन्य इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें उन समूहों और संगठनों की सूची में शामिल किया है, जिन पर संघर्ष के दौरान यौन हिंसा के आरोप लगे हैं।
United Nations की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद Israel ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस्राइल ने संयुक्त राष्ट्र पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया और संगठन को “भ्रष्ट” तथा “राजनीतिक एजेंडा से प्रभावित” बताया। इसके साथ ही इस्राइल ने UN महासचिव António Guterres के साथ आधिकारिक संपर्क सीमित करने का फैसला भी किया है।
इस्राइली अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करती है और UN की रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है। वहीं रूस ने भी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। Russia का कहना है कि पश्चिमी देशों के प्रभाव में आकर UN ऐसी रिपोर्ट जारी कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की इस सूची में आमतौर पर वे संगठन या सशस्त्र समूह शामिल किए जाते हैं, जिन पर युद्ध के दौरान यौन हिंसा, बच्चों के खिलाफ अपराध या मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप होते हैं। ऐसे में किसी संप्रभु देश की सैन्य इकाइयों का इसमें शामिल होना बेहद संवेदनशील और असाधारण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर पश्चिम एशिया और यूरोप की भू-राजनीति पर पड़ सकता है। खासतौर पर गाजा संघर्ष और यूक्रेन युद्ध के बीच यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय बहस को और तेज कर सकती है। मानवाधिकार संगठनों ने जहां UN की कार्रवाई का समर्थन किया है, वहीं कई देशों ने निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग की है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया पहले से ही कई बड़े संघर्षों और कूटनीतिक तनावों का सामना कर रही है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
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