रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.9% रहने का अनुमान जताया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, पश्चिमी एशिया में अस्थिरता और महंगाई के जोखिमों के बावजूद RBI का मानना है कि भारत की घरेलू मांग और मजबूत आर्थिक आधार देश की ग्रोथ को सहारा देंगे।
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी खपत, सरकारी पूंजीगत खर्च और सेवा क्षेत्र की मजबूती आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग में सुधार देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि भारत की बैंकिंग व्यवस्था पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत हुई है। बैंकों की बैलेंस शीट बेहतर हुई है और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में कमी आई है। इसके अलावा डिजिटल भुगतान और तकनीकी सुधारों ने भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है।
हालांकि RBI ने पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता भी जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होती है तो इसका असर महंगाई और आयात बिल पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा, वैश्विक व्यापार में सुस्ती, अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव और विदेशी निवेश के प्रवाह में कमी जैसे कारक भी चुनौती बन सकते हैं। बावजूद इसके, RBI का कहना है कि भारत की मजबूत घरेलू खपत, बढ़ता निवेश और सरकारी नीतियां अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे पर लगातार निवेश, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाएं आने वाले वर्षों में भारत की विकास गति को मजबूत बनाए रखेंगी। साथ ही, रोजगार और विनिर्माण क्षेत्र में सुधार से भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
RBI की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इसके बावजूद भारत के लिए 6.9% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान यह संकेत देता है कि देश की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में बनी हुई है।

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