बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब सबकी नजर सात मई को होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हुई है। राजधानी पटना के गांधी मैदान में इसके लिए भव्य समारोह आयोजित किया जा रहा है। राजनीतिक रूप से इस कार्यक्रम को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार भाजपा मंत्रिमंडल में कई नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में है। पार्टी युवा नेताओं, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों का चयन कर सकती है। भाजपा का फोकस केवल अनुभवी नेताओं पर नहीं, बल्कि ऐसे चेहरों पर भी रहेगा जो आने वाले समय में पार्टी की राजनीति को मजबूत कर सकें।
बताया जा रहा है कि भाजपा अपने कोटे से पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और महिला वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके अलावा मिथिलांचल, सीमांचल, मगध, भोजपुर और उत्तर बिहार जैसे क्षेत्रों का संतुलन भी ध्यान में रखा जाएगा। कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि पहली बार विधायक बने कुछ नेताओं को भी कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलेगा। जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के हिस्से में भी मंत्री पद जाने की चर्चा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को सबसे अधिक हिस्सेदारी मिल सकती है, जबकि चिराग पासवान की पार्टी को भी महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने पर विचार हो रहा है।
जीतन राम मांझी की पार्टी HAM और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है। हालांकि, किस दल को कितने मंत्री पद मिलेंगे, इसे लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। भाजपा और सहयोगी दलों के बीच सीटों और विभागों को लेकर लगातार मंथन जारी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ सरकार गठन की औपचारिकता नहीं, बल्कि 2029 के राजनीतिक समीकरणों की नींव भी साबित हो सकता है। भाजपा बिहार में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है। ऐसे में नए चेहरों को मौका देकर पार्टी भविष्य की राजनीति को मजबूत करने का संकेत दे सकती है।
अब सभी की नजर सात मई के समारोह और मंत्रियों की अंतिम सूची पर टिकी हुई है, जिससे बिहार की नई राजनीतिक दिशा का संकेत मिलेगा।
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