Iran इंटरनेट ट्रैफिक पर नया “डिजिटल टोल टैक्स” लगाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समुद्र के नीचे बिछी अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट केबल्स पर शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। अगर यह कदम लागू होता है, तो इसका असर दुनिया भर की टेक कंपनियों के साथ-साथ आम इंटरनेट यूजर्स पर भी पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि यह योजना खासतौर पर Strait of Hormuz क्षेत्र से गुजरने वाली समुद्री इंटरनेट केबल्स को लेकर तैयार की जा रही है। यह इलाका पहले से ही वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। अब ईरान इसे डिजिटल रणनीति के तौर पर भी इस्तेमाल करना चाहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इंटरनेट केबल्स पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया, तो डेटा ट्रांसमिशन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे Netflix, YouTube और क्लाउड सेवाओं पर पड़ सकता है। कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ यूजर्स पर डाल सकती हैं, जिससे सब्सक्रिप्शन महंगे होने की आशंका है।
सिर्फ कीमत ही नहीं, इंटरनेट स्पीड पर भी असर पड़ सकता है। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेटवर्क ट्रैफिक और रूटिंग में बदलाव होने पर कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की गति धीमी हो सकती है। खासकर वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और क्लाउड सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, ईरान की ओर से अभी इस योजना को लेकर आधिकारिक और विस्तृत घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स सामने आने के बाद वैश्विक टेक इंडस्ट्री में चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञ इसे इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते भू-राजनीतिक नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
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