डॉक्टरों के अनुसार, थैलेसीमिया मुख्य रूप से माता-पिता से बच्चों में आनुवंशिक रूप से फैलता है। अगर माता और पिता दोनों इस बीमारी के “कैरियर” हों, तो बच्चे में थैलेसीमिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ शादी से पहले या परिवार बढ़ाने की योजना से पहले थैलेसीमिया स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं।
क्यों चढ़ाना पड़ता है बार-बार खून?
थैलेसीमिया के गंभीर मरीजों में शरीर पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता। इससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है और मरीज को कमजोरी, थकान, सांस फूलना और विकास रुकने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे मरीजों को नियमित अंतराल पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है ताकि शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य बना रहे।
क्या हैं इसके लक्षण?
विशेषज्ञों के मुताबिक थैलेसीमिया के लक्षण बचपन से ही दिखाई देने लग सकते हैं, जैसे:
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शरीर में अत्यधिक कमजोरी
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चेहरा पीला पड़ना
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बच्चों की धीमी शारीरिक वृद्धि
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बार-बार थकान महसूस होना
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सांस लेने में दिक्कत
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पेट या हड्डियों में सूजन
हालांकि कुछ लोग केवल कैरियर होते हैं और उनमें कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
कैसे करें बचाव?
डॉक्टरों का कहना है कि थैलेसीमिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और समय पर जांच है। शादी से पहले थैलेसीमिया टेस्ट करवाने से यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति कैरियर है या नहीं। अगर दोनों पार्टनर कैरियर हों, तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी माना जाता है।
इलाज क्या है?
थैलेसीमिया का इलाज मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। गंभीर मामलों में नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन, दवाएं और बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर यह भी बताते हैं कि समय पर इलाज और सही देखभाल से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और स्क्रीनिंग के जरिए इस बीमारी के बढ़ते खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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