World Health Organization ने हंतावायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डब्ल्यूएचओ ने बताया कि हंतावायरस के मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है और प्रभावित देशों की मदद के लिए पांच देशों को विशेष डायग्नोस्टिक किट भेजी गई हैं। हालांकि संगठन ने साफ किया है कि फिलहाल इस संक्रमण के कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी बनने की आशंका नहीं है।
डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में हंतावायरस संक्रमण के और मामले सामने आ सकते हैं, इसलिए स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। संगठन ने कहा कि शुरुआती पहचान और समय पर जांच संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
हंतावायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और अन्य कृंतकों के संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस उनके मूत्र, लार या मल के जरिए इंसानों तक पहुंच सकता है। संक्रमित धूल के कण सांस के जरिए शरीर में जाने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हंतावायरस आमतौर पर इंसान से इंसान में आसानी से नहीं फैलता, यही वजह है कि इसे कोविड-19 जैसी तेजी से फैलने वाली महामारी नहीं माना जा रहा। फिर भी स्वास्थ्य एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी बढ़ा रही हैं।
हंतावायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे हो सकते हैं। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। गंभीर मामलों में यह फेफड़ों और किडनी को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण जानलेवा भी साबित हो सकता है।
डब्ल्यूएचओ ने लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, चूहों से दूरी रखने और संक्रमित क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी है। खासतौर पर ग्रामीण और जंगल वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। WHO और विभिन्न देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
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