अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस का प्रकोप एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। कांगो और युगांडा में सामने आए मामलों के बाद अब कई अन्य देशों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस बीच World Health Organization के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि इबोला का मौजूदा प्रकोप उम्मीद से ज्यादा तेजी से फैल रहा है और इसे नियंत्रित करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण की रफ्तार और शुरुआती लक्षणों की समानता को देखते हुए यह स्थिति कई मामलों में कोरोना महामारी के शुरुआती दौर की याद दिला रही है। यही वजह है कि वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां अब इस प्रकोप को लेकर ज्यादा सतर्क हो गई हैं।
क्या है इबोला वायरस?
Ebola एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलती है। इसमें तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में अंदरूनी एवं बाहरी रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार यह बीमारी तेजी से अंगों को प्रभावित कर सकती है।
इबोला की मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है। पिछले प्रकोपों में कई क्षेत्रों में मौत का आंकड़ा 50 प्रतिशत से भी ज्यादा दर्ज किया गया था।
क्यों बढ़ रही चिंता?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार संक्रमण के मामले तेजी से अलग-अलग क्षेत्रों में फैलते दिख रहे हैं। सीमावर्ती आवाजाही, कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था और शुरुआती पहचान में देरी इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं।
WHO अधिकारियों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में संक्रमित मरीजों की ट्रैकिंग और आइसोलेशन में कठिनाई आ रही है। यही वजह है कि संक्रमण अपेक्षा से ज्यादा तेजी से फैलता दिख रहा है।
कोरोना से कैसे मिलती है स्थिति?
विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला और कोरोना वायरस पूरी तरह अलग बीमारियां हैं, लेकिन कुछ शुरुआती परिस्थितियां समान नजर आ रही हैं। जैसे—
- संक्रमण के शुरुआती मामलों को लेकर अनिश्चितता
- सीमाओं के पार संक्रमण फैलने का खतरा
- स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
- लोगों में डर और अफवाहों का फैलना
- वैश्विक निगरानी एजेंसियों की बढ़ती चिंता
हालांकि वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि कोरोना वायरस मुख्य रूप से हवा के जरिए फैलता था, जबकि इबोला संक्रमित शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। इसलिए दोनों की संक्रमण प्रक्रिया अलग है।
क्या दुनिया को फिर महामारी का खतरा है?
फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में वैक्सीनेशन, आइसोलेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग अभियान तेज किए गए हैं। कई देशों ने एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और मेडिकल निगरानी भी बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती स्तर पर संक्रमण को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह कई देशों के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। हालांकि अभी इसे वैश्विक महामारी घोषित नहीं किया गया है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार—
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचें
- स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
- अफवाहों से बचें और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें
- प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करते समय सावधानी बरतें
- किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
इबोला का बढ़ता प्रकोप एक बार फिर दुनिया को यह याद दिला रहा है कि संक्रामक बीमारियों के खिलाफ सतर्कता और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी जरूरी है।
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