अमेरिका में डॉक्टरों की कमी के बीच ट्रंप प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए विदेशी डॉक्टरों के आव्रजन आवेदनों पर लगी रोक को आंशिक रूप से हटा दिया है। इस कदम से उन कई चिकित्सकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके आवेदन लंबे समय से अटके हुए थे। हालांकि, प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि सभी लंबित आवेदनों को मंजूरी मिलेगी या नहीं, इसको लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने कुछ विशेष मामलों की दोबारा समीक्षा शुरू करने का फैसला किया है। इसमें खास तौर पर वे डॉक्टर शामिल हैं, जो अमेरिका के ग्रामीण और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी वाले इलाकों में काम करने के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि देश में लगातार बढ़ रही डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के कारण प्रशासन को यह निर्णय लेना पड़ा।
दरअसल, पिछले कुछ समय से कई विदेशी डॉक्टरों के वीजा और आव्रजन आवेदन जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक रोक के कारण लंबित पड़े थे। इससे अमेरिकी अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में स्टाफ की कमी और ज्यादा बढ़ गई थी। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्था काफी हद तक विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टरों पर निर्भर करती है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय समेत कई देशों के डॉक्टर अमेरिका में सेवाएं देते हैं। ऐसे में आव्रजन प्रक्रिया में देरी का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा था।
हालांकि, ट्रंप प्रशासन के इस नए फैसले के बावजूद अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। अधिकारियों ने स्पष्ट नहीं किया है कि कितने आवेदनों को मंजूरी मिलेगी और प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा। कई डॉक्टर और मेडिकल संगठन अब भी स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानियां न हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विदेशी डॉक्टरों के आव्रजन मामलों को तेजी से निपटाया गया तो इससे अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, भारतीय डॉक्टरों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय चिकित्सक अमेरिका में काम करने की इच्छा रखते हैं।
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