नई ग्रीन कार्ड पॉलिसी पर बढ़ा विवाद, टेक कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन को घेरा


 अमेरिका में Donald Trump प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड नीति को लेकर तकनीकी उद्योग में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। नई नीति के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अब अमेरिका के भीतर से नहीं, बल्कि अपने मूल देश यानी होम कंट्री से आवेदन करना होगा। इस फैसले ने खासकर टेक कंपनियों और स्टार्टअप जगत की चिंता बढ़ा दी है।

नई नीति को लेकर कई बड़ी टेक कंपनियों और उद्योग से जुड़े नेताओं ने आशंका जताई है कि इससे अमेरिका में कुशल पेशेवरों की कमी हो सकती है। LinkedIn और Coursera जैसी कंपनियों से जुड़े संस्थापकों और टेक विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से दुनिया भर के प्रतिभाशाली इंजीनियरों, डेवलपर्स और रिसर्चर्स के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यदि इमिग्रेशन नियम अधिक कठोर बनाए जाते हैं, तो प्रतिभाशाली लोग दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं।

टेक इंडस्ट्री का मानना है कि अमेरिका की आर्थिक और तकनीकी ताकत का बड़ा हिस्सा वैश्विक टैलेंट पर आधारित है। सिलिकॉन वैली की कई बड़ी कंपनियों में बड़ी संख्या में विदेशी पेशेवर काम करते हैं। ऐसे में नई ग्रीन कार्ड नीति से कंपनियों को योग्य कर्मचारियों की भर्ती और उन्हें लंबे समय तक बनाए रखने में मुश्किलें आ सकती हैं।

दूसरी ओर, अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी United States Citizenship and Immigration Services (USCIS) ने इस नीति का बचाव किया है। एजेंसी का कहना है कि यह नियम उन लोगों को रोकने के लिए लाया गया है जो वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में अवैध रूप से रह जाते हैं। प्रशासन का तर्क है कि इससे इमिग्रेशन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति का असर केवल इमिग्रेशन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव अमेरिकी टेक इंडस्ट्री, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकता है। कई विश्लेषकों का कहना है कि यदि विदेशी टैलेंट के लिए अमेरिका में अवसर सीमित होते हैं, तो कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप जैसे देश इसका फायदा उठा सकते हैं।

नई ग्रीन कार्ड नीति को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिका की राजनीति और तकनीकी उद्योग दोनों में बड़ा विषय बना रह सकता है।

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