नीतीश राणा के विकेट पर मचा विवाद, संजू सैमसन भी चर्चा में; जानिए नियम क्या कहते हैं


 दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के मुकाबले में नीतीश राणा का विकेट चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि गेंद स्टंप्स पर लगने से पहले ही बेल्स गिर चुकी थीं। इसके बाद क्रिकेट फैंस के बीच बहस शुरू हो गई कि क्या इस स्थिति में अंपायर को गेंद “डेड बॉल” घोषित करनी चाहिए थी।

वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि अगर बेल्स पहले से गिरी हुई थीं, तो बल्लेबाज को आउट कैसे दिया गया। इसी बहस के दौरान राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन का नाम भी चर्चा में आ गया, क्योंकि इससे पहले उनके एक मैच में भी इसी तरह का विवाद देखने को मिला था। क्रिकेट प्रेमी दोनों घटनाओं की तुलना करते हुए नियमों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

दरअसल, क्रिकेट के नियमों के अनुसार बल्लेबाज को बोल्ड आउट देने के लिए गेंद का विकेट को सही तरीके से तोड़ना जरूरी होता है। सामान्य स्थिति में इसका मतलब होता है कि गेंद लगने के बाद कम से कम एक बेल्स गिरनी चाहिए। लेकिन अगर किसी कारण से बेल्स पहले से गिरी हुई हों, तब नियम अलग तरीके से लागू होते हैं।

मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के नियम 29 के मुताबिक, यदि बेल्स पहले से जमीन पर गिरी हों तो गेंद से स्टंप को अपनी जगह से हिलाना या उखाड़ना जरूरी माना जाता है। यानी केवल गेंद का स्टंप्स को छू लेना काफी नहीं होता। अंपायर यह देखते हैं कि गेंद लगने के बाद विकेट वास्तव में टूटा या नहीं।

यही वजह है कि नीतीश राणा के विकेट पर विवाद बढ़ गया। वायरल वीडियो में कुछ एंगल्स से ऐसा लग रहा था कि बेल्स पहले हिल चुकी थीं, जबकि अन्य फुटेज में गेंद लगने के बाद स्टंप्स के हिलने की बात कही गई। टीवी अंपायर ने उपलब्ध कैमरा एंगल्स देखने के बाद बल्लेबाज को आउट करार दिया, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही है।

क्रिकेट में तकनीक आने के बाद ऐसे फैसलों की जांच अधिक बारीकी से होने लगी है, लेकिन कई बार कैमरा एंगल और फ्रेम दर फ्रेम तस्वीरें भी भ्रम पैदा कर देती हैं। यही कारण है कि फैंस और पूर्व खिलाड़ी अलग-अलग राय दे रहे हैं।

फिलहाल आधिकारिक तौर पर मैच अधिकारियों की ओर से फैसले में किसी गलती की बात नहीं कही गई है। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर क्रिकेट के जटिल नियमों और तकनीकी फैसलों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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