‘जन-गण-मन और वंदे मातरम बराबर नहीं’: केंद्र के फैसले पर ओवैसी का विरोध


 Asaduddin Owaisi ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के समान कानूनी संरक्षण देने की बात कही गई है। ओवैसी ने साफ शब्दों में कहा कि दोनों की संवैधानिक स्थिति अलग है और ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के बराबर नहीं रखा जा सकता।

ओवैसी ने कहा कि भारत का संविधान किसी देवी-देवता के नाम से नहीं, बल्कि “हम भारत के लोग” शब्दों से शुरू होता है। उनके मुताबिक, देश की पहचान संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है, न कि किसी धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक से। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ को संविधान और कानून के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है, जबकि ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अहमियत जरूर है, लेकिन दोनों को समान कानूनी स्तर पर रखना उचित नहीं होगा।

एआईएमआईएम प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत एक विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग धर्मों और विचारों के लोग रहते हैं। ऐसे में किसी एक गीत को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की कोशिश विवाद पैदा कर सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह भावनात्मक मुद्दों को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का प्रयास कर रही है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत ‘वंदे मातरम’ को अधिक कानूनी सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई। इसके बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा और उसके समर्थक इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसे अनावश्यक विवाद खड़ा करने वाला फैसला बताया है।

‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आजादी के संघर्ष का प्रमुख नारा रहा है और इसका ऐतिहासिक महत्व बेहद बड़ा माना जाता है। वहीं ‘जन-गण-मन’ को संविधान के तहत भारत का आधिकारिक राष्ट्रगान घोषित किया गया है।

ओवैसी के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह विषय संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ