दुनियाभर में हाल के दिनों में Hantavirus और Norovirus के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। दोनों वायरस इंसानों में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकते हैं, लेकिन इनके फैलने का तरीका, लक्षण और शरीर पर असर काफी अलग होता है। ऐसे में लोगों के लिए इन दोनों के बीच का अंतर समझना जरूरी है।
क्या है हंटावायरस?
हंटावायरस मुख्य रूप से चूहों और दूसरे संक्रमित कृन्तकों (Rodents) के जरिए फैलता है। जब इंसान संक्रमित चूहों के मल, पेशाब या लार के संपर्क में आता है, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। कई बार संक्रमित धूल के कण सांस के जरिए शरीर में चले जाते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है।
हंटावायरस का संक्रमण फेफड़ों और किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, थकान, सिरदर्द और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
क्या है नोरोवायरस?
नोरोवायरस को “स्टमक फ्लू” फैलाने वाले सबसे आम वायरसों में गिना जाता है। यह मुख्य रूप से दूषित खाना, गंदा पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। यह वायरस बेहद तेजी से फैल सकता है, खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे स्कूल, होटल, क्रूज शिप और अस्पतालों में।
नोरोवायरस के लक्षण आमतौर पर पेट से जुड़े होते हैं। इसमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द, मतली और कमजोरी महसूस हो सकती है। ज्यादातर लोग कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
दोनों वायरस में सबसे बड़ा अंतर
हंटावायरस और नोरोवायरस के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके फैलने के तरीके और शरीर पर असर को लेकर है।
- हंटावायरस मुख्य रूप से चूहों से फैलता है और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
- नोरोवायरस दूषित भोजन और संक्रमित व्यक्ति से फैलता है और पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा करता है।
इसके अलावा हंटावायरस के मामले अपेक्षाकृत कम लेकिन ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं, जबकि नोरोवायरस तेजी से फैलने वाला आम संक्रमण है।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों के मुताबिक,
- घर और आसपास सफाई बनाए रखें।
- चूहों से संपर्क से बचें।
- खाना खाने से पहले हाथ जरूर धोएं।
- दूषित भोजन और गंदे पानी से बचें।
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर सावधानी बरतें।
डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी तरह के गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती सावधानी और सही जानकारी ही इन वायरल संक्रमणों से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।
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