छात्र राजनीति से असम के मुख्यमंत्री तक: ऐसा रहा हिमंत बिस्व सरमा का राजनीतिक सफर


 Himanta Biswa Sarma का राजनीतिक करियर भारतीय राजनीति में तेजी से उभरने वाली उन कहानियों में शामिल है, जिसमें छात्र राजनीति से लेकर मुख्यमंत्री पद तक का सफर लगातार संघर्ष, रणनीति और संगठनात्मक कौशल के दम पर तय किया गया। असम की राजनीति में आज उनका नाम सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है, लेकिन इसकी शुरुआत छात्र आंदोलनों से हुई थी।

हिमंत बिस्व सरमा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) से की थी। असम आंदोलन के दौर में छात्र राजनीति राज्य की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी और इसी माहौल में उन्होंने अपनी पहचान बनाई। छात्र संगठन में सक्रिय रहते हुए उन्होंने जमीनी राजनीति की बारीकियों को समझा और लोगों के बीच मजबूत पकड़ बनाई।

इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और धीरे-धीरे पार्टी के भीतर अपनी मजबूत स्थिति बनाई। कांग्रेस शासन के दौरान वे लगातार दो मुख्यमंत्रियों के साथ काम करते हुए सत्ता और संगठन दोनों में अहम भूमिका निभाते रहे। पहले उन्होंने Tarun Gogoi सरकार में मंत्री के रूप में काम किया और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले। उनकी प्रशासनिक क्षमता और फैसले लेने की शैली ने उन्हें राज्य के प्रभावशाली नेताओं की सूची में शामिल कर दिया।

कांग्रेस में रहते हुए हिमंत बिस्व सरमा को रणनीतिकार नेता माना जाता था। संगठन पर उनकी पकड़ मजबूत होती गई और वे चुनावी राजनीति में भी पार्टी के लिए अहम चेहरा बनकर उभरे। हालांकि, समय के साथ कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनके मतभेद बढ़ने लगे। खासकर मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और पार्टी नेतृत्व के साथ दूरी ने उनके राजनीतिक भविष्य को नई दिशा दी।

साल 2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर Narendra Modi और Amit Shah की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। यह फैसला असम की राजनीति में बड़ा बदलाव माना गया। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी संभाली और बेहद कम समय में खुद को पार्टी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में स्थापित कर लिया।

उनकी रणनीति और संगठनात्मक क्षमता का असर 2016 के असम विधानसभा चुनाव में साफ दिखाई दिया, जब भाजपा ने पहली बार राज्य में सरकार बनाई। इसके बाद हिमंत बिस्व सरमा पार्टी के सबसे मजबूत क्षेत्रीय चेहरों में शामिल हो गए। अंततः 2021 में भाजपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाया। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे पूर्वोत्तर की राजनीति में भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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