सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को ठहराया वैध, कहा- मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग का अधिकार


 मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराना भारत के चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया बेहद जरूरी है। अदालत ने एसआईआर की वैधता को बरकरार रखते हुए उससे जुड़ी सभी प्रमुख आपत्तियों को खारिज कर दिया।

दरअसल, कई याचिकाओं में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि चुनाव आयोग के पास इस तरह की व्यापक पुनरीक्षण प्रक्रिया चलाने की शक्ति नहीं है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों से सहमति नहीं जताई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि संविधान और चुनाव संबंधी कानून चुनाव आयोग को मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाए रखने की जिम्मेदारी देते हैं। यदि मतदाता सूची में त्रुटियां, फर्जी नाम या मृत मतदाताओं के नाम बने रहते हैं, तो इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में चुनाव आयोग को समय-समय पर विशेष पुनरीक्षण कराने का पूरा अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए शुद्ध और पारदर्शी मतदाता सूची बेहद आवश्यक है। अदालत के अनुसार, निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सही मतदाता सूची भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक जरूरी कदम माना जाएगा।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है। जब तक आयोग की कार्रवाई कानून और संविधान के दायरे में है, तब तक उसमें न्यायिक हस्तक्षेप सीमित रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव आयोग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। साथ ही, यह फैसला भविष्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी आधार बनेगा।

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