क्रिकेट मैदान पर दर्दनाक मौत: आखिर एथलीटों में क्यों बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले?


 र्व क्रिकेटर SL Akshay की मैदान पर अचानक हार्ट अटैक से मौत ने खेल जगत को झकझोर दिया है। महज 39 साल की उम्र में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर फिट और एक्टिव दिखने वाले एथलीट भी हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट का शिकार क्यों हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ फिट दिखना ही दिल के पूरी तरह स्वस्थ होने की गारंटी नहीं होता। कई बार शरीर के अंदर छिपी समस्याएं अचानक जानलेवा बन जाती हैं।

एथलीटों में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों की बड़ी वजहें

1. छिपी हुई हृदय संबंधी बीमारियां

कई खिलाड़ियों में जन्मजात या अनडायग्नोज्ड हार्ट डिजीज होती है, जिसका लंबे समय तक पता नहीं चलता। तेज शारीरिक गतिविधि के दौरान दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ सकता है।

2. जरूरत से ज्यादा शारीरिक दबाव

लगातार हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग, कम आराम और ओवरएक्सर्शन दिल की मांसपेशियों पर असर डाल सकता है। कई एथलीट अपने शरीर की चेतावनी को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

3. तनाव और अनियमित जीवनशैली

प्रोफेशनल खिलाड़ियों पर प्रदर्शन का भारी दबाव रहता है। मानसिक तनाव, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन और खराब रिकवरी भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि मानसिक तनाव हार्ट डिजीज का बड़ा कारण बनता जा रहा है।

4. सप्लीमेंट और स्टेरॉयड का इस्तेमाल

कुछ खिलाड़ी फिटनेस बढ़ाने के लिए बिना मेडिकल सलाह के सप्लीमेंट्स या स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है, जो हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाती है।

5. नियमित हेल्थ चेकअप की कमी

कई एथलीट अपनी फिटनेस पर भरोसा करके नियमित हार्ट स्क्रीनिंग नहीं करवाते। ECG, Echo और स्ट्रेस टेस्ट जैसी जांचें समय पर होने से कई गंभीर समस्याओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है।

किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी को खेलते समय सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना, अत्यधिक थकान या दिल की धड़कन तेज महसूस हो, तो तुरंत मेडिकल जांच करवानी चाहिए।

कैसे कम किया जा सकता है खतरा?

  • नियमित हार्ट चेकअप करवाएं
  • जरूरत से ज्यादा ट्रेनिंग से बचें
  • पर्याप्त आराम और नींद लें
  • संतुलित आहार अपनाएं
  • बिना डॉक्टर की सलाह सप्लीमेंट न लें
  • शरीर के चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें

फिटनेस जरूरी है, लेकिन दिल की सेहत उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। समय रहते जांच और सावधानी कई गंभीर हादसों को टाल सकती है।

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