क्या कहता है कानून?
भारत में पालतू जानवरों को लेकर अलग-अलग राज्यों और नगर निगमों के अपने नियम हैं, लेकिन भारतीय दंड संहिता (IPC) और अब लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत लापरवाही के मामलों में कार्रवाई संभव है। यदि यह साबित हो जाए कि कुत्ते के मालिक ने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती और उसकी लापरवाही के कारण किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा, तो पुलिस मामला दर्ज कर सकती है।
अगर कुत्ता खुले में बिना नियंत्रण के घूम रहा था, या मालिक ने उसे बांधकर नहीं रखा था, या आक्रामक व्यवहार के बावजूद सुरक्षा उपाय नहीं किए गए थे, तो यह लापरवाही मानी जा सकती है।
किन परिस्थितियों में हो सकती है जेल?
यदि कुत्ते के काटने से किसी व्यक्ति को गंभीर चोट आती है या जान का खतरा पैदा हो जाता है, तो मालिक पर लापरवाही से चोट पहुंचाने जैसी धाराएं लग सकती हैं। गंभीर मामलों में गिरफ्तारी और जेल की संभावना भी बन सकती है। खासकर तब, जब पहले भी कुत्ते के आक्रामक होने की शिकायतें मिल चुकी हों और मालिक ने उन्हें नजरअंदाज किया हो।
कुछ मामलों में कोर्ट यह भी देखती है कि मालिक ने डॉग को वैक्सीन लगवाई थी या नहीं, उसे सार्वजनिक जगह पर पट्टे (Leash) में रखा गया था या नहीं और घटना के बाद घायल व्यक्ति की मदद की गई या नहीं।
डॉग मालिकों के लिए जरूरी सावधानियां
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पालतू कुत्ते का समय-समय पर वैक्सीनेशन जरूर कराएं।
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सार्वजनिक जगहों पर डॉग को हमेशा लीश में रखें।
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अगर कुत्ता आक्रामक स्वभाव का है, तो जरूरत पड़ने पर माउथ कवर (Muzzle) का इस्तेमाल करें।
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बच्चों और अनजान लोगों के आसपास विशेष सावधानी बरतें।
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स्थानीय नगर निगम में पालतू डॉग का रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं।
पीड़ित व्यक्ति क्या कर सकता है?
अगर किसी को पालतू कुत्ता काट लेता है, तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट और घटना के सबूत के आधार पर मुआवजे की मांग भी की जा सकती है। कई मामलों में अदालतें पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश भी दे चुकी हैं।
पालतू जानवर रखना गलत नहीं है, लेकिन उनकी वजह से किसी दूसरे व्यक्ति की सुरक्षा खतरे में न पड़े, इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह मालिक की होती है।
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