Android Liquid Glass Design: क्या एपल जैसा बदल जाएगा एंड्रॉयड? Google ने अफवाहों पर दी सफाई


 गूगल के आगामी इवेंट ‘The Android Show’ को लेकर टेक जगत में काफी उत्साह बना हुआ है। 12 मई को होने वाले इस इवेंट में कंपनी एंड्रॉयड से जुड़े कई बड़े अपडेट और नए फीचर्स पेश कर सकती है। लेकिन इवेंट से पहले एक खास चर्चा ने लोगों का ध्यान खींच लिया है — क्या एंड्रॉयड का नया डिजाइन एपल के “लिक्विड ग्लास” जैसे विजुअल स्टाइल से प्रेरित होने वाला है?

हाल ही में गूगल द्वारा जारी किए गए टीजर वीडियो के बाद सोशल मीडिया और टेक कम्युनिटी में ऐसी अटकलें तेज हो गई थीं कि कंपनी एंड्रॉयड इंटरफेस में बड़ा विजुअल बदलाव करने जा रही है। कई लोगों ने दावा किया कि नया डिजाइन ज्यादा ग्लॉसी, ट्रांसपेरेंट और एनिमेटेड हो सकता है, जो कुछ हद तक एपल के डिजाइन लैंग्वेज जैसा दिखाई देगा। हालांकि, अब गूगल अधिकारियों ने इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति साफ करने की कोशिश की है।

Google ने क्या कहा?

कंपनी से जुड़े अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि एंड्रॉयड का फोकस पूरी तरह किसी दूसरे प्लेटफॉर्म की नकल करने पर नहीं है। गूगल अपने मौजूदा डिजाइन सिस्टम “Material 3” को और ज्यादा इंटरैक्टिव और एक्सप्रेसिव बनाने पर काम कर रहा है। यानी यूजर इंटरफेस को ज्यादा स्मूद, पर्सनलाइज्ड और विजुअली आकर्षक बनाया जाएगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि एंड्रॉयड पूरी तरह एपल जैसा दिखने लगेगा।

Material 3 Expressive पर रहेगा फोकस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल अब “Material 3 Expressive” डिजाइन लैंग्वेज को आगे बढ़ा सकता है। इसमें—

  • बेहतर एनिमेशन
  • अधिक डायनामिक कलर सिस्टम
  • स्मूद ट्रांजिशन
  • ज्यादा रिस्पॉन्सिव UI
  • बेहतर विजुअल डेप्थ

जैसे फीचर्स शामिल हो सकते हैं।

इसका उद्देश्य यूजर्स को ज्यादा आधुनिक और इंटरैक्टिव अनुभव देना है, खासकर फोल्डेबल और AI आधारित डिवाइसेज़ के लिए।

Android 17 को लेकर भी बढ़ी चर्चा

‘The Android Show’ में एंड्रॉयड 17 से जुड़े शुरुआती फीचर्स और बदलावों की झलक भी देखने को मिल सकती है। माना जा रहा है कि इस बार AI इंटीग्रेशन, बैटरी ऑप्टिमाइजेशन, प्राइवेसी और मल्टी-डिवाइस कनेक्टिविटी पर ज्यादा जोर रहेगा।

इसके अलावा गूगल अपने Pixel डिवाइसेज़ और Gemini AI इकोसिस्टम से जुड़े नए फीचर्स भी पेश कर सकता है।

एपल और एंड्रॉयड की डिजाइन लड़ाई फिर चर्चा में

हर बार जब एंड्रॉयड में बड़ा विजुअल बदलाव आता है, तो उसकी तुलना एपल के iOS से शुरू हो जाती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों कंपनियों की डिजाइन फिलॉसफी अलग है। एपल जहां क्लीन और नियंत्रित इंटरफेस पर फोकस करता है, वहीं एंड्रॉयड अधिक कस्टमाइजेशन और ओपन अनुभव देने की कोशिश करता है।

फिलहाल यह साफ है कि गूगल एंड्रॉयड को ज्यादा आधुनिक और आकर्षक बनाने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन “लिक्विड ग्लास” जैसी चर्चाओं को कंपनी ने बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई अफवाह बताया है। अब सभी की नजर 12 मई के इवेंट पर टिकी हुई है, जहां एंड्रॉयड के भविष्य की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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