Airtel ‘Priority Postpaid’ पर उठे सवाल, कंपनी ने DoT के सामने दी सफाई


 भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में भारती एयरटेल की नई ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सर्विस को लेकर बहस तेज हो गई है। इस सेवा को लेकर नेट न्यूट्रैलिटी और इंटरनेट स्पीड में भेदभाव जैसे सवाल उठने के बाद कंपनी ने दूरसंचार विभाग (DoT) के पैनल के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। एयरटेल का कहना है कि उसकी यह नई सुविधा पूरी तरह नियमों के दायरे में है और इससे प्रीपेड ग्राहकों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा।

Bharti Airtel ने अपनी सफाई में कहा कि ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सेवा 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक के जरिए कुछ विशेष उपयोगकर्ताओं को बेहतर नेटवर्क रिस्पॉन्स और कम लेटेंसी दी जा सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बाकी ग्राहकों की स्पीड जानबूझकर कम की जाएगी।

कंपनी के मुताबिक, प्रीपेड यूजर्स की इंटरनेट क्वालिटी और नेटवर्क एक्सपीरियंस पहले जैसा ही रहेगा। एयरटेल ने जोर देकर कहा कि यह सेवा नेटवर्क संसाधनों के अधिक स्मार्ट प्रबंधन के लिए तैयार की गई है, न कि किसी ग्राहक वर्ग के साथ भेदभाव करने के लिए।

दरअसल, नेट न्यूट्रैलिटी के नियम कहते हैं कि सभी इंटरनेट यूजर्स को समान एक्सेस और स्पीड मिलनी चाहिए। ऐसे में कुछ विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों ने सवाल उठाया कि क्या ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सेवा अमीर और प्रीमियम ग्राहकों को बेहतर इंटरनेट देकर बाकी यूजर्स को पीछे छोड़ देगी। इसी मुद्दे पर DoT की ओर से कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा गया था।

एयरटेल ने पैनल को बताया कि नेटवर्क स्लाइसिंग 5G तकनीक का एक मान्य हिस्सा है और इसका इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर हेल्थकेयर, ऑटोमेशन, गेमिंग और एंटरप्राइज सेवाओं में कम लेटेंसी वाले नेटवर्क की जरूरत पड़ती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में 5G सेवाओं के विस्तार के साथ इस तरह की प्रीमियम नेटवर्क सुविधाओं को लेकर बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल सरकार और रेगुलेटरी एजेंसियां इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि नई तकनीक के नाम पर इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच किसी तरह का अनुचित भेदभाव न हो।

अब सबकी नजर DoT और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी के अगले कदम पर है, क्योंकि यह मामला भविष्य में भारत में 5G सेवाओं के मॉडल को प्रभावित कर सकता है

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