क्या AI बना रहा है इंसानों को मानसिक रूप से आलसी? नई स्टडी में चौंकाने वाला दावा


 ChatGPT, Gemini और दूसरे एआई टूल्स का बढ़ता इस्तेमाल लोगों की सोचने-समझने की क्षमता पर असर डाल सकता है। एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि केवल 10 मिनट तक एआई टूल्स का उपयोग भी इंसान की खुद से निर्णय लेने, समस्याओं को हल करने और गहराई से सोचने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।

स्टडी के अनुसार, जब लोग किसी सवाल का जवाब खोजने, लेख लिखने या निर्णय लेने के लिए लगातार एआई पर निर्भर रहने लगते हैं, तो उनका दिमाग धीरे-धीरे कम सक्रिय होने लगता है। रिसर्चर्स का कहना है कि एआई की तुरंत जवाब देने वाली क्षमता इंसानों को तेजी से सुविधा तो देती है, लेकिन इससे “क्रिटिकल थिंकिंग” यानी गहराई से विश्लेषण करने की आदत कमजोर हो सकती है।

अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों को अलग-अलग कार्य दिए गए। कुछ लोगों ने बिना एआई की मदद के समस्याएं हल कीं, जबकि दूसरे समूह ने एआई टूल्स का इस्तेमाल किया। रिसर्च में पाया गया कि एआई का उपयोग करने वाले प्रतिभागियों ने काम जल्दी पूरा किया, लेकिन बाद में उन्हीं विषयों पर स्वतंत्र रूप से सोचने और तर्क देने में वे अपेक्षाकृत कमजोर साबित हुए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई टूल्स का लगातार उपयोग दिमाग को “शॉर्टकट मोड” में डाल सकता है। यानी लोग खुद रिसर्च करने, जानकारी को समझने और निष्कर्ष निकालने के बजाय सीधे एआई से जवाब लेना पसंद करने लगते हैं। इससे सीखने की प्रक्रिया और याद रखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, रिसर्चर्स ने यह भी साफ किया कि एआई पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है। सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर यह सीखने, रिसर्च और उत्पादकता बढ़ाने में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। समस्या तब पैदा होती है जब लोग हर छोटे-बड़े काम के लिए पूरी तरह एआई पर निर्भर हो जाते हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि एआई को “सहायक उपकरण” की तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि इंसानी सोच का विकल्प बनाकर। खासतौर पर छात्रों और युवाओं को सलाह दी गई है कि वे एआई से मिले जवाबों को समझें, उनका विश्लेषण करें और खुद भी सोचने की आदत बनाए रखें।

एआई तकनीक तेजी से लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही है। ऐसे में यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या अत्यधिक एआई इस्तेमाल भविष्य में इंसानों की रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच को प्रभावित कर सकता है। नई स्टडी ने इस चिंता को और गंभीर बना दिया है।

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