AI से बने विज्ञापनों पर सख्ती की तैयारी: ASCI लाए नए गाइडलाइंस, डीपफेक और फर्जी दावों पर रहेगी नजर


 भारत में विज्ञापन की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इसका बड़ा हिस्सा बन चुका है। कंपनियां AI की मदद से विज्ञापन तैयार कर रही हैं, वर्चुअल मॉडल बना रही हैं और यहां तक कि वीडियो व आवाज को भी डिजिटल तरीके से तैयार किया जा रहा है। लेकिन AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी दावे, डीपफेक और लोगों को भ्रमित करने वाले विज्ञापनों का खतरा भी बढ़ गया है।

इसी को देखते हुए Advertising Standards Council of India (ASCI) ने AI आधारित विज्ञापनों के लिए नए दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है। इन प्रस्तावित गाइडलाइंस का उद्देश्य विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को गुमराह होने से बचाना है।

AI विज्ञापनों पर क्यों बढ़ी चिंता?

पिछले कुछ समय में AI की मदद से बनाए गए विज्ञापनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कंपनियां AI टूल्स के जरिए ऐसी तस्वीरें, वीडियो और आवाज तैयार कर पा रही हैं जो बिल्कुल असली लगती हैं। यही तकनीक “डीपफेक” जैसे खतरनाक ट्रेंड को भी बढ़ावा दे रही है।

डीपफेक तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा या आवाज नकली तरीके से इस्तेमाल की जा सकती है। इससे लोगों को गलत जानकारी दी जा सकती है या किसी सेलिब्रिटी और सार्वजनिक व्यक्ति के नाम का गलत इस्तेमाल कर फर्जी विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं।

ASCI का मानना है कि अगर AI आधारित विज्ञापनों पर स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए, तो उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर हो सकता है।

नए गाइडलाइंस में क्या खास?

प्रस्तावित नियमों के तहत कंपनियों को यह साफ बताना पड़ सकता है कि किसी विज्ञापन में AI का इस्तेमाल किया गया है या नहीं। अगर किसी वीडियो, फोटो या आवाज को AI से बनाया गया है, तो उसकी जानकारी दर्शकों को देना जरूरी हो सकता है।

इसके अलावा, विज्ञापनों में किए गए दावों की सच्चाई और प्रमाण भी जरूरी होंगे। यानी कंपनियां AI की मदद से ऐसे झूठे या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे नहीं कर सकेंगी जो ग्राहकों को भ्रमित करें।

गाइडलाइंस में खासतौर पर डीपफेक कंटेंट, फर्जी टेस्टिमोनियल और नकली पहचान के इस्तेमाल पर नजर रखने की बात कही गई है।

ग्राहकों को कैसे मिलेगा फायदा?

इन नियमों के लागू होने के बाद लोगों के लिए असली और AI-जनरेटेड कंटेंट के बीच फर्क समझना आसान हो सकता है। इससे फर्जी विज्ञापनों, ऑनलाइन ठगी और गलत जानकारी फैलाने की घटनाओं पर भी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन उसका जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल जरूरी है। सही नियमों के जरिए कंपनियों को इनोवेशन की आजादी भी मिलेगी और ग्राहकों का भरोसा भी बना रहेगा।

विज्ञापन उद्योग के लिए बड़ा संकेत

ASCI की यह पहल दिखाती है that भारत में AI के इस्तेमाल को लेकर अब गंभीर स्तर पर नियम बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में AI आधारित विज्ञापनों पर और सख्त निगरानी देखने को मिल सकती है।

तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से उसके गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना अब डिजिटल विज्ञापन उद्योग की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है।

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