आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल दुनियाभर की कंपनियों में तेजी से बढ़ रहा है। कंपनियां अपने कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने, डेटा एनालिसिस तेज करने और ऑटोमेशन के लिए AI टूल्स का जमकर उपयोग कर रही हैं। लेकिन अब AI का अनियंत्रित इस्तेमाल कई कंपनियों के लिए बड़ा आर्थिक संकट भी बनता जा रहा है। हाल ही में एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी को कर्मचारियों द्वारा बिना किसी सीमा के AI टूल्स इस्तेमाल करने के कारण सिर्फ एक महीने में करीब 4,100 करोड़ रुपये यानी लगभग 500 मिलियन डॉलर का भारी बिल भरना पड़ा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने कर्मचारियों को AI चैटबॉट्स, कोडिंग टूल्स और डेटा प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म्स का “अनलिमिटेड एक्सेस” दे दिया था। शुरुआत में इसका उद्देश्य काम की गति बढ़ाना और कर्मचारियों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। लेकिन धीरे-धीरे हजारों कर्मचारी लगातार भारी मात्रा में AI मॉडल्स का उपयोग करने लगे, जिससे क्लाउड कंप्यूटिंग और प्रोसेसिंग लागत तेजी से बढ़ गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक AI मॉडल्स को चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर और महंगे सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। खासकर बड़े भाषा मॉडल (LLMs) और जनरेटिव AI टूल्स का उपयोग कंपनियों के लिए बेहद खर्चीला साबित हो सकता है, यदि उन पर उपयोग की सीमा तय न की जाए।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई कर्मचारी AI टूल्स का इस्तेमाल केवल काम के लिए ही नहीं, बल्कि एक्सपेरिमेंट, टेस्टिंग और निजी उद्देश्यों के लिए भी करने लगे थे। इससे कंपनी का AI खर्च अनुमान से कई गुना ज्यादा बढ़ गया।
यह मामला टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है। Microsoft, Amazon और अन्य बड़ी कंपनियां भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती लागत को लेकर चिंतित बताई जा रही हैं। AI मॉडल्स को ट्रेन और रन करने में भारी मात्रा में बिजली, डेटा सेंटर क्षमता और हाई-एंड चिप्स की जरूरत पड़ती है, जिससे कंपनियों का बजट प्रभावित हो रहा है।
AI सेक्टर में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कई कंपनियां कर्मचारियों को नए AI टूल्स अपनाने की छूट दे रही हैं। हालांकि अब विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि कंपनियों को AI उपयोग के लिए स्पष्ट नियम, लिमिट और मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने चाहिए। इससे अनावश्यक खर्च को नियंत्रित किया जा सकता है और डेटा सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी कम किए जा सकते हैं।
यह घटना दिखाती है कि AI तकनीक जितनी शक्तिशाली है, उतनी ही महंगी भी साबित हो सकती है। अगर कंपनियां बिना रणनीति और नियंत्रण के AI पर निर्भर होती हैं, तो इसका असर सीधे उनके बजट और मुनाफे पर पड़ सकता है।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ