सोशल मीडिया दिग्गज Meta Platforms एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी 20 मई को करीब 8,000 कर्मचारियों को बाहर करने की तैयारी में है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब कंपनी के सीईओ Mark Zuckerberg लगातार एआई आधारित तकनीकों और छोटी लेकिन ज्यादा प्रभावी टीमों पर जोर दे रहे हैं।
मेटा पिछले कुछ समय से अपने बिजनेस मॉडल में बड़े बदलाव कर रही है। कंपनी अब पारंपरिक विस्तार की बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और हाई-परफॉर्मेंस टीम स्ट्रक्चर पर फोकस कर रही है। माना जा रहा है कि यही वजह है कि कंपनी कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम कर रही है ताकि खर्च घटाया जा सके और संसाधनों को एआई प्रोजेक्ट्स में लगाया जा सके।
मार्क जुकरबर्ग पहले भी “Year of Efficiency” यानी दक्षता बढ़ाने वाले साल की बात कर चुके हैं। इसी रणनीति के तहत मेटा ने पिछले वर्षों में भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी की थी। अब कंपनी एक बार फिर उसी दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, इस बार छंटनी का असर टेक्निकल, ऑपरेशंस और सपोर्ट टीमों पर ज्यादा पड़ सकता है।
मेटा फिलहाल एआई टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रही है। कंपनी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स — Facebook, Instagram और WhatsApp — में एआई फीचर्स को तेजी से बढ़ा रही है। इसके अलावा कंपनी अपने एआई मॉडल और स्मार्ट असिस्टेंट टेक्नोलॉजी को भी मजबूत बनाने में लगी हुई है ताकि वह टेक इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धियों से आगे रह सके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा का पूंजीगत खर्च इस साल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। कंपनी बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर, एआई चिप्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई की दौड़ में बने रहने के लिए टेक कंपनियां भारी खर्च कर रही हैं और मेटा भी उसी रणनीति पर काम कर रही है।
हालांकि, लगातार हो रही छंटनी को लेकर कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। कई लोग नौकरी की अस्थिरता और बढ़ते वर्कलोड को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, निवेशकों का एक वर्ग इसे कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति और लागत नियंत्रण की दिशा में जरूरी कदम मान रहा है।
मेटा के इस फैसले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में टेक इंडस्ट्री में एआई सबसे बड़ा फोकस रहने वाला है, भले ही इसके लिए कंपनियों को बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव क्यों न करने पड़ें।
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