घरेलू शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। सोमवार सुबह शेयर बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब एक प्रतिशत तक टूट गए। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रुपये में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में गिरावट का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर देखने को मिला।
लाल निशान में खुला बाजार
सोमवार सुबह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 800 से अधिक अंक टूटकर 74 हजार के करीब पहुंच गया। सुबह करीब 9 बजकर 29 मिनट पर सेंसेक्स 879 अंक से ज्यादा गिरकर 74,358 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 255 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,387 के स्तर पर पहुंच गया।
शुरुआती कारोबार में ही बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए तेजी से मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा।
रुपये में रिकॉर्ड गिरावट
शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 96.20 तक पहुंच गया। रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर और ज्यादा गहरा हो सकता है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बनीं बड़ी वजह
बाजार में इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल माना जा रहा है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त अरब अमीरात में एक परमाणु केंद्र पर हुए ड्रोन हमले और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ने से तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद ने वैश्विक निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान को दी गई चेतावनी के बाद बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक बाजारों में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। इसका असर सिर्फ भारतीय बाजार पर ही नहीं बल्कि अमेरिका, जापान, चीन और हांगकांग के बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
सोमवार को कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
सबसे ज्यादा नुकसान वाले शेयरों में टाटा स्टील, पावर ग्रिड, मारुति, ट्रेंट, टाइटन और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
हालांकि आईटी और टेलीकॉम सेक्टर ने थोड़ी मजबूती दिखाई। इंफोसिस, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और टीसीएस जैसे शेयर हल्की बढ़त में कारोबार करते नजर आए।
शुक्रवार को भी रहा था दबाव
इससे पहले शुक्रवार को भी घरेलू शेयर बाजार दबाव में बंद हुआ था। सेंसेक्स करीब 160 अंक टूटकर 75,237 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी गिरावट के साथ 23,643 पर बंद हुआ था।
लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट आने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की स्थिति और पश्चिम एशिया का तनाव आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया के हालात और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हुई है। अगर स्थिति सामान्य नहीं हुई तो शेयर बाजार में आगे भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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