लगातार घंटों तक बैठकर काम करना आज की कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है। हाल ही में American Heart Association की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि रोजाना लंबे समय तक बैठने वाले लोगों में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। खासतौर पर ऑफिस में डेस्क जॉब करने वाले कर्मचारियों में यह जोखिम अधिक देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बैठकर काम करने से शरीर की गतिविधि कम हो जाती है, जिससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। इससे वजन बढ़ने, ब्लड सर्कुलेशन धीमा होने और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि लंबे समय तक बैठे रहने से मानसिक तनाव और थकान की समस्या भी बढ़ती है।
इन्हीं खतरों को देखते हुए अब कई विशेषज्ञ कंपनियों को “4-डे वर्किंग कल्चर” अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि सप्ताह में चार दिन काम और बाकी समय आराम या शारीरिक गतिविधियों के लिए मिलने से कर्मचारियों की सेहत बेहतर हो सकती है। इससे न सिर्फ तनाव कम होगा बल्कि कर्मचारियों की उत्पादकता और कार्य क्षमता में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
दुनिया के कई देशों में 4-डे वर्किंग मॉडल पर प्रयोग किए जा चुके हैं, जहां सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। कर्मचारियों ने बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस, कम तनाव और ज्यादा ऊर्जा महसूस की। वहीं कंपनियों को भी कर्मचारियों की बेहतर परफॉर्मेंस और संतुष्टि का फायदा मिला।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि ऑफिस में काम करने वाले लोग हर 30 से 40 मिनट में कुछ देर के लिए उठकर चलें, स्ट्रेचिंग करें और हल्की फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें। इसके अलावा नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद भी जरूरी है।
बदलती कार्य संस्कृति के बीच अब कंपनियां भी कर्मचारियों की सेहत को प्राथमिकता देने लगी हैं। ऐसे में आने वाले समय में 4-डे वर्किंग कल्चर को लेकर दुनिया भर में और चर्चा तेज हो सकती है।
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