हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और उनकी कृपा पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत बेहद खास माना जाता है। वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आने वाली विकट संकष्टी चतुर्थी को लेकर इस बार लोगों में भ्रम है कि व्रत 5 अप्रैल को रखें या 6 अप्रैल को।
सही तिथि क्या है?
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल को शुरू होकर 6 अप्रैल तक रहेगी। लेकिन व्रत रखने का नियम “चंद्रोदय” (चंद्रमा निकलने) के आधार पर तय होता है।
इसलिए विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल 2026 (रविवार) को रखा जाएगा।
क्यों 5 अप्रैल को ही व्रत?
संकष्टी चतुर्थी का व्रत उस दिन रखा जाता है, जिस दिन चंद्रमा का दर्शन किया जाता है। 5 अप्रैल की रात को चंद्रोदय होने के कारण यही दिन व्रत के लिए मान्य है।
पूजा विधि (Step-by-Step)
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें
- घर के मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें
- उन्हें दूर्वा, लाल फूल, मोदक और लड्डू अर्पित करें
- “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें
- दिनभर व्रत रखें (निर्जला या फलाहार)
- शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें
क्या करें और क्या न करें?
व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें
पूजा में श्रद्धा और नियम का पालन करें
तामसिक भोजन (लहसुन-प्याज) से बचें
झूठ बोलने और क्रोध करने से दूर रहें
व्रत का महत्व
विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, कर्ज और संकट से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
निष्कर्ष
अगर आप भी इस पावन व्रत को रखना चाहते हैं, तो 5 अप्रैल 2026 को व्रत रखें और विधि-विधान से पूजा करें। इससे भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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