अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। जमीन और कूटनीतिक टकराव के बाद अब यह संघर्ष ‘साइबर युद्ध’ का रूप ले चुका है, जहां निशाने पर आम लोग नहीं बल्कि अहम औद्योगिक सिस्टम हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान से जुड़े हैकर्स अब United States के पावर प्लांट, वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम और अन्य इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट कर रहे हैं। इन हमलों का मकसद सिर्फ डेटा चोरी करना नहीं, बल्कि मशीनों को कंट्रोल करके पूरे सिस्टम को ठप करना है।
यह खतरा इसलिए भी ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि ऐसे सिस्टम देश की बुनियादी जरूरतों से जुड़े होते हैं। अगर पावर ग्रिड या पानी की सप्लाई बाधित होती है, तो इसका असर सीधे आम जनता के जीवन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के साइबर हमले पारंपरिक युद्ध से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि इनमें बिना किसी भौतिक हमले के बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया जा सकता है। साथ ही, ऐसे हमलों का पता लगाना और उन्हें रोकना भी काफी मुश्किल होता है।
Iran और United States के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों के बीच यह साइबर गतिविधियां हालात को और संवेदनशील बना रही हैं।
अगर यह ‘साइबर वार’ और तेज होता है, तो इसका असर सिर्फ इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और टेक्नोलॉजी सिस्टम्स पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब इस नए डिजिटल मोर्चे पर टिकी हुई है।
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