अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच जहां फिलहाल दो हफ्तों का युद्धविराम लागू है, वहीं ईरान की आंतरिक राजनीति और सैन्य ढांचे को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। यह युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, और इसी दौरान आई एक रिपोर्ट ने संकेत दिए हैं कि देश के भीतर सत्ता का संतुलन बदल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में अब पारंपरिक सरकारी ढांचे की जगह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रभाव काफी बढ़ गया है। दावा किया जा रहा है कि IRGC अब केवल एक सैन्य संगठन नहीं रह गया है, बल्कि वह देश की सेना और विदेश नीति जैसे अहम फैसलों में भी प्रमुख भूमिका निभा रहा है। इससे यह संकेत मिलते हैं कि ईरान में निर्णय लेने की प्रक्रिया अब पहले से अधिक केंद्रीकृत और सैन्य-प्रभावित हो सकती है।
खबर में यह भी बताया गया है कि एक वरिष्ठ कमांडर, जिनका नाम वाहिद बताया जा रहा है, को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में IRGC की भूमिका और भी मजबूत हो सकती है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की रिपोर्ट्स ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वास्तव में IRGC का नियंत्रण बढ़ता है, तो इसका असर ईरान की विदेश नीति पर भी पड़ सकता है। इससे अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं। साथ ही, मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
वहीं, कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यह बदलाव अस्थायी हो सकता है और मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति के कारण IRGC को अधिक अधिकार दिए गए हों। युद्धविराम खत्म होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है कि क्या यह बदलाव स्थायी है या फिर सामान्य स्थिति बहाल होगी।
फिलहाल, सभी की नजरें 22 अप्रैल पर टिकी हैं, जब युद्धविराम समाप्त होगा। इसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि ईरान की आंतरिक सत्ता संरचना में जो बदलाव देखने को मिल रहे हैं, वे कितने गहरे और स्थायी हैं।

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