EVM Diagnostic Check: किन पार्ट्स की होगी जांच, समझिए पूरा मामला


 Bombay High Court के फैसले के बाद अब Electronic Voting Machine (EVM) की जांच का रास्ता साफ हो गया है। यह जांच पहली बार चुनाव के बाद मशीनों की विश्वसनीयता पर सवालों के बीच की जा रही है।

 किन पार्ट्स की होगी जांच?

EVM के डायग्नोस्टिक चेक में मुख्य रूप से इन अहम हिस्सों को परखा जाएगा:

1. कंट्रोल यूनिट (Control Unit)

यह EVM का सबसे अहम हिस्सा होता है

  • इसमें सभी वोट्स का डेटा स्टोर होता है
  • यही यूनिट रिजल्ट दिखाती है
  • पूरी वोटिंग प्रक्रिया इसी से कंट्रोल होती है

 जांच में देखा जाएगा कि डेटा सुरक्षित है या उसमें कोई छेड़छाड़ हुई है या नहीं।

2. बैलेट यूनिट (Ballot Unit)

  • यही वो डिवाइस है जहां मतदाता बटन दबाकर वोट देता है
  • इसमें उम्मीदवारों की लिस्ट होती है

 चेक किया जाएगा कि बटन और कनेक्शन सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।

3. VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail)

  • यह मशीन वोट देने के बाद एक पेपर स्लिप प्रिंट करती है
  • मतदाता को अपने वोट की पुष्टि करने में मदद मिलती है

 जांच में देखा जाएगा कि स्लिप सही तरीके से जनरेट हो रही है या नहीं।

4. माइक्रोकंट्रोलर और बर्न्ट मेमोरी

  • EVM का दिमाग कहा जाता है
  • इसमें पहले से प्रोग्राम किया गया डेटा रहता है

 तकनीकी ऑडिट के जरिए यह जांच होगी कि

  • कोई अनधिकृत बदलाव (tampering) तो नहीं हुआ
  • सॉफ्टवेयर पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं

 कौन करेगा जांच?

  • EVM बनाने वाली कंपनी Bharat Electronics Limited (BEL) के इंजीनियर
  • साथ में चुनाव अधिकारी और याचिकाकर्ता पक्ष के एक्सपर्ट मौजूद रहेंगे

 कैसे होगी प्रक्रिया?

  • मशीन पहले self-diagnostic test करेगी
  • फिर इंजीनियर टेक्निकल ऑडिट करेंगे
  • करीब 5% EVM (लगभग 20 मशीनें) जांच के लिए चुनी जाएंगी

 क्यों है यह फैसला अहम?

यह फैसला EVM की पारदर्शिता और भरोसे को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। इस जांच से यह स्पष्ट होगा कि मशीनों में किसी तरह की छेड़छाड़ संभव है या नहीं।

 निष्कर्ष

EVM की जांच में कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट, VVPAT और माइक्रोकंट्रोलर जैसे अहम हिस्सों को परखा जाएगा। Bombay High Court का यह कदम चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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