स्मार्टफोन्स में फिर लौटेगा ‘रिमूवेबल बैटरी’ का दौर—European Union के नए नियम से बड़ा बदलाव


 स्मार्टफोन इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। European Union (EU) ने नया नियम लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत 2027 तक सभी कंपनियों को ऐसे स्मार्टफोन और गैजेट्स बनाने होंगे, जिनकी बैटरी यूजर्स खुद आसानी से निकाल और बदल सकें।

क्या है नया नियम?

EU के इस नियम का मकसद इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट (ई-कचरा) को कम करना और डिवाइस की लाइफ बढ़ाना है। अभी ज्यादातर स्मार्टफोन्स में बैटरी फिक्स होती है, जिसे बदलने के लिए सर्विस सेंटर जाना पड़ता है। नए नियम के बाद यूजर्स खुद बैटरी बदल सकेंगे, जिससे रिपेयर आसान और सस्ता हो जाएगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

हर साल लाखों टन ई-कचरा पैदा होता है, जिसमें बड़ी संख्या स्मार्टफोन्स की होती है। European Union का मानना है कि अगर बैटरी आसानी से बदली जा सके, तो लोग फोन जल्दी नहीं बदलेंगे और इससे कचरा कम होगा।

कंपनियों की बढ़ेंगी मुश्किलें

इस नियम से Apple और Samsung जैसी बड़ी कंपनियों को अपने डिजाइन में बड़ा बदलाव करना पड़ेगा। अभी ये कंपनियां स्लिम और सीलबंद डिजाइन पर फोकस करती हैं, लेकिन रिमूवेबल बैटरी के लिए डिजाइन को दोबारा तैयार करना होगा।

यूजर्स को क्या फायदा?

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलेगा।

  • बैटरी खराब होने पर नया फोन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी
  • सस्ते में बैटरी बदलकर फोन की लाइफ बढ़ाई जा सकेगी
  • रिपेयर कॉस्ट कम होगी

यानी यह नियम आपकी जेब के हजारों रुपये बचा सकता है।

क्या भारत पर भी पड़ेगा असर?

हालांकि यह नियम अभी European Union तक सीमित है, लेकिन ग्लोबल कंपनियां अक्सर एक जैसे डिजाइन को कई बाजारों में लागू करती हैं। ऐसे में भारत सहित अन्य देशों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, यह फैसला स्मार्टफोन इंडस्ट्री को एक बार फिर पुराने दौर की ओर ले जा सकता है—जहां यूजर अपने फोन पर ज्यादा नियंत्रण रखता था और छोटी खराबी के लिए पूरा डिवाइस बदलने की जरूरत नहीं पड़ती थी।

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