Child Cancer Deaths Global: भारत जैसे गरीब देशों में 10 में से 9 बच्चे गंवा रहे जान, लैंसेट की रिपोर्ट ने हिला दिया


 हाल ही में द लैंसेट (The Lancet) में प्रकाशित Global Burden of Disease 2023 स्टडी ने बच्चों में कैंसर से होने वाली मौतों को लेकर गंभीर तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली बाल मृत्यु में असमानता स्पष्ट है—गरीब और विकासशील देशों में स्थिति सबसे चिंताजनक है।

बच्चों में कैंसर से मौतों का ग्लोबल परिदृश्य

  • रिपोर्ट के अनुसार 10 में से 9 बच्चे, जो कैंसर से मर रहे हैं, वे गरीब देशों से हैं।
  • भारत समेत कई दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी देशों में बच्चों के लिए आधुनिक कैंसर ट्रीटमेंट और डाइग्नोस्टिक सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।
  • वहीं, उच्च आय वाले देशों में बच्चों के कैंसर से बचने की दर काफी अधिक है, जिससे असमानता और बढ़ जाती है।

असमानता के कारण

  1. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
    • कई गरीब देशों में बच्चों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक और उचित अस्पतालों की संख्या सीमित है।
  2. देर से डायग्नोसिस
    • शुरुआती लक्षणों को पहचानने में देरी के कारण कैंसर का इलाज शुरू होने से पहले ही गंभीर स्थिति बन जाती है।
  3. उपचार की महंगाई
    • कीमोथेरपी, रेडियोथेरेपी और सर्जरी जैसी सुविधाओं की लागत अधिक होती है। गरीब परिवार इसे वहन नहीं कर पाते।
  4. जनजागरूकता की कमी
    • कैंसर के शुरुआती लक्षणों और बच्चों में होने वाले संकेतों के प्रति जागरूकता कम है।

भारत की स्थिति

भारत में बाल कैंसर का बुरा हाल है।

  • हर साल हजारों बच्चों की जान बचाई जा सकती है अगर समय पर इलाज और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।
  • ग्रामीण और गरीब इलाकों में विशेषकर बच्चों का एक्सेस अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों तक मुश्किल है।

रिपोर्ट का संदेश

  • बच्चों के कैंसर में मृत्यु दर को घटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, सस्ती और आसान उपलब्ध उपचार सुविधा, और जनजागरूकता अभियान जरूरी हैं।
  • उच्च आय वाले देशों की तुलना में गरीब देशों में सुधार के बिना यह असमानता लगातार बढ़ती जाएगी।

निष्कर्ष

द लैंसेट की यह रिपोर्ट दुनिया के लिए चेतावनी है: बच्चों की जान बचाने के लिए जल्दी और सुलभ इलाज, मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली और जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। भारत जैसे देश जहां 10 में से 9 बाल मृत्यु गरीब बच्चों में हो रही है, वहां यह कदम और भी जरूरी हो जाता है।

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