जातीय सर्वेक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर जातीय सर्वेक्षण की प्रक्रिया को टालना चाहती है। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने एक साल पहले जातीय सर्वे को लेकर घोषणा तो कर दी थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है, जबकि जमीन पर कोई तैयारी दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में जातीय सर्वेक्षण कराना चाहती, तो अब तक इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी होती। कांग्रेस का कहना है कि जातीय आंकड़े सामने आने से सामाजिक और आर्थिक असमानताओं की सही तस्वीर सामने आएगी, जिससे नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
कांग्रेस लगातार यह मांग करती रही है कि देश में व्यापक जातीय जनगणना कराई जाए, ताकि विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। पार्टी का मानना है कि इससे आरक्षण, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है। वहीं, बीजेपी और केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, जातीय सर्वेक्षण का मुद्दा आगामी चुनावों में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। बिहार में जातीय सर्वे के बाद इस बहस को और गति मिली है। विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी प्रक्रिया शुरू की जाए।
फिलहाल कांग्रेस के आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
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