ऑटो इंडस्ट्री के लिए सरकार ने बड़ा और स्पष्ट संदेश दे दिया है। 2027 से लागू होने वाले CAFE-III (कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता) मानकों को लेकर अब किसी तरह की समयसीमा बढ़ाने या ढील देने की कोई संभावना नहीं है। Ministry of Heavy Industries ने साफ कर दिया है कि तय समय पर ही इन नियमों को लागू किया जाएगा और सभी ऑटो कंपनियों को इनका पालन करना अनिवार्य होगा।
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Hanif Qureshi के अनुसार, उद्योग जगत के साथ इस मुद्दे पर लगातार बातचीत चल रही है और कंपनियों को पर्याप्त समय पहले ही दिया जा चुका है। ऐसे में अब समयसीमा बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बचता।
CAFE-III नियमों का उद्देश्य वाहनों की ईंधन दक्षता बढ़ाना और प्रदूषण को कम करना है। इसके तहत ऑटो कंपनियों को अपने बेड़े (fleet) की औसत ईंधन खपत को तय मानकों के भीतर रखना होगा। यानी कंपनियों को ज्यादा फ्यूल-एफिशिएंट और पर्यावरण के अनुकूल वाहन बनाने पर जोर देना पड़ेगा।
सरकार के इस फैसले से साफ है कि अब ऑटो सेक्टर को तेजी से नई तकनीकों की ओर बढ़ना होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइब्रिड टेक्नोलॉजी और बेहतर इंजन एफिशिएंसी पर कंपनियों को अधिक निवेश करना पड़ेगा, ताकि वे तय मानकों को पूरा कर सकें।
हालांकि, इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों की ओर से पहले इन नियमों को लागू करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग उठाई गई थी, लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि पर्यावरण संरक्षण और ईंधन दक्षता को लेकर सरकार अब किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।
आने वाले समय में यह फैसला भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा, जहां प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ कीमत या फीचर्स की नहीं, बल्कि एफिशिएंसी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भी होगी।
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