होर्मुज के पास जहाज पर टकराव—चीन से ईरान जा रहे ‘मिसाइल केमिकल’ पर विवाद


 होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका द्वारा ईरानी कार्गो जहाज “टोस्का” को अपने कब्जे में लेने के बाद इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। इस घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिनमें सबसे गंभीर आरोप यह है कि जहाज में मिसाइलों से जुड़े डुअल-यूज केमिकल लदे हो सकते थे।

यह विवाद तब और गहरा गया जब भारतीय मूल की एक पूर्व अमेरिकी राजदूत ने दावा किया कि जहाज पर ऐसे रसायन मौजूद थे, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य—दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। ऐसे डुअल-यूज केमिकल्स को लेकर वैश्विक स्तर पर पहले से ही सख्त निगरानी रहती है, क्योंकि इन्हें हथियार निर्माण में भी उपयोग किया जा सकता है।

अमेरिका का कहना है कि उसे इस जहाज पर सैन्य उपयोग की संभावित सामग्री होने की आशंका थी, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उनका यह भी कहना है कि ऐसे किसी भी शिपमेंट को रोका जाना जरूरी है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

वहीं, ईरान ने इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने इसे “समुद्री डकैती” करार देते हुए अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि यह एक अवैध कदम है और जब तक इस तरह की नाकेबंदी समाप्त नहीं की जाती, वह किसी भी प्रकार की वार्ता के लिए तैयार नहीं होगा।

इस पूरे घटनाक्रम में चीन का नाम सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि, चीन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि यह साबित होता है कि जहाज चीन से ही रवाना हुआ था और उसमें संदिग्ध सामग्री थी, तो इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही एक संवेदनशील समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

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