होर्मुज में अमेरिकी सख्ती: ईरानी-रूसी तेल पर छूट खत्म, भारत के लिए बढ़ी चिंता


 मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान और रूस से तेल खरीद पर दी जा रही छूट को खत्म करने का संकेत दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने साफ कहा है कि वाशिंगटन अब ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में दी गई छूट का नवीनीकरण नहीं करेगा, जो इस सप्ताह समाप्त हो रही है। इसके साथ ही रूस के तेल पर लागू समान प्रकार की छूट को भी समाप्त करने की तैयारी है। इस फैसले का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ना तय माना जा रहा है, वहीं भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, पहले ही भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका की सख्ती से यहां नाकेबंदी जैसी स्थिति बनने का खतरा और बढ़ सकता है। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा और तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इस फैसले से सीधे प्रभावित हो सकता है। अब तक भारत रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर अपने खर्च को नियंत्रित कर रहा था। वहीं, ईरान से भी सीमित मात्रा में तेल आयात की संभावनाएं बनी रहती थीं। लेकिन अमेरिकी छूट खत्म होने के बाद इन विकल्पों पर दबाव बढ़ेगा, जिससे भारत को महंगे विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत को महंगे दामों पर तेल खरीदना पड़ा, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई पर दबाव और चालू खाते के घाटे में इजाफा जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

हालांकि, भारत पहले भी ऐसे वैश्विक दबावों का सामना कर चुका है और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश में सक्रिय रहा है। अब देखना होगा कि इस नई स्थिति में भारत किस तरह संतुलन बनाता है और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।

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