Ashwagandha Leaves Ban: दवाओं में क्यों नहीं होंगी अब अश्वगंधा की पत्तियां इस्तेमाल? जानें वजह


 हाल ही में FSSAI और AYUSH Ministry ने अश्वगंधा (Withania somnifera) की पत्तियों के इस्तेमाल को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब दवाओं और हेल्थ सप्लीमेंट्स में अश्वगंधा की पत्तियों के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, यह पूरी तरह से बैन नहीं है, बल्कि एक सीमित प्रतिबंध है।

इसका मतलब यह है कि अश्वगंधा की जड़ (root), जो पारंपरिक आयुर्वेद में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, उस पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। प्रतिबंध केवल पत्तियों के उपयोग तक सीमित है।

क्यों लगाया गया यह प्रतिबंध?

इस फैसले के पीछे मुख्य कारण लिवर से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं हैं। हाल के कुछ अध्ययनों और रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि अश्वगंधा की पत्तियों के सेवन से कुछ मामलों में लिवर टॉक्सिसिटी (Liver Toxicity) का खतरा बढ़ सकता है। यानी यह लीवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, खासकर जब इन्हें लंबे समय तक या अधिक मात्रा में लिया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि अश्वगंधा की पत्तियों में कुछ ऐसे सक्रिय तत्व (compounds) पाए जाते हैं, जो शरीर पर जड़ के मुकाबले अलग और कभी-कभी हानिकारक असर डाल सकते हैं।

क्या पूरी तरह बैन हो गया है अश्वगंधा?

नहीं, अश्वगंधा पूरी तरह से बैन नहीं हुआ है। आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली इसकी जड़ अब भी सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है। इसलिए बाजार में मिलने वाले अधिकांश अश्वगंधा उत्पाद, जो जड़ से बने होते हैं, पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे।

आम लोगों के लिए क्या है सलाह?

अगर आप अश्वगंधा का सेवन करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो यह ध्यान रखें कि

  • केवल प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पाद ही खरीदें
  • डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बिना लंबे समय तक सेवन न करें
  • अगर पहले से लिवर से जुड़ी कोई समस्या है, तो खास सावधानी बरतें

निष्कर्ष

अश्वगंधा की पत्तियों पर लगाया गया यह प्रतिबंध सुरक्षा के लिहाज से एक एहतियाती कदम है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पाद सुरक्षित रहें और लोगों की सेहत पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े

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