संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर मंथन शुरू, 33% सीटें आरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम


 संसद में आज से महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों पर चर्चा की शुरुआत हो रही है। तीन दिवसीय विशेष सत्र के तहत यह बहस बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है। लोकसभा में इस मुद्दे पर करीब 18 घंटे की विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है, जिसमें सभी दल अपने विचार रखेंगे।

इस बीच कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने परिसीमन विधेयक के विरोध में नोटिस दिया है। उनका कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया कई राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इस पर व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है। विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं जताई हैं।

विशेष सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया था कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल देश की लोकतांत्रिक संरचना को और मजबूत करेगी और महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी का अवसर देगी।

प्रस्तावित बदलावों के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया जाएगा। लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब ठोस प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है। अगर यह बिल पारित होता है, तो यह देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।

हालांकि, परिसीमन को लेकर बहस तेज है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्निर्धारण से राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बदल सकता है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में इसको लेकर विशेष चिंता जताई जा रही है।

अब सभी की नजरें संसद में चल रही इस बहस पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या नहीं, और क्या यह ऐतिहासिक विधेयक आसानी से पारित हो पाता है।

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