पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है।
Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। निवेशकों की चिंता के चलते कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude का भाव बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि अमेरिकी सूचक West Texas Intermediate (WTI) 97.6 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा। यह बढ़त ऐसे समय में आई है, जब वैश्विक बाजार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बेहद अहम मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से तक कच्चा तेल पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव या अवरोध सप्लाई चेन को सीधे प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि निवेशक सतर्क हो गए हैं और तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों के अनुसार, अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, बल्कि भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
इस उछाल का असर शेयर बाजारों और मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है। तेल की बढ़ती कीमतें परिवहन और उत्पादन लागत को बढ़ाती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगी।
फिलहाल निवेशकों की नजरें क्षेत्र में जारी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि होर्मुज से जुड़ी किसी भी खबर का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
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