हर साल 3 मार्च को World Hearing Day मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को सुनने से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करना है। इस अवसर पर World Health Organization (WHO) ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक दुनिया की लगभग 10% आबादी गंभीर सुनने की समस्या से जूझ सकती है।
क्या कहती है WHO की रिपोर्ट?
WHO की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, करोड़ों लोग पहले से ही कम सुनने (Hearing Loss) या बहरापन (Deafness) जैसी समस्याओं से प्रभावित हैं। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या तेजी से बढ़ेगी। इसका सबसे बड़ा कारण है—तेज आवाज़ों का लगातार संपर्क और ईयरफोन/हेडफोन का अत्यधिक उपयोग।
सुनने की समस्या के मुख्य कारण
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लाउड म्यूजिक और हेडफोन का ज्यादा इस्तेमाल
आजकल युवा घंटों तक ऊंची आवाज़ में गाने सुनते हैं। 85 डेसिबल से अधिक आवाज़ लंबे समय तक सुनना कानों के लिए हानिकारक हो सकता है। -
शहरी शोर (Noise Pollution)
ट्रैफिक, निर्माण कार्य और औद्योगिक शोर भी धीरे-धीरे सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाते हैं। -
बढ़ती उम्र (Age-related Hearing Loss)
उम्र बढ़ने के साथ कान की नसें कमजोर होने लगती हैं, जिससे सुनने की क्षमता घटती है। -
संक्रमण और अनदेखी
बार-बार कान में संक्रमण होना या समय पर इलाज न कराना भी स्थायी नुकसान का कारण बन सकता है।
कैसे करें बचाव?
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60/60 नियम अपनाएं: अधिकतम 60% वॉल्यूम पर 60 मिनट से ज्यादा न सुनें।
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तेज शोर वाले स्थानों पर ईयरप्लग का उपयोग करें।
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कान में दर्द, बजना (Tinnitus) या सुनने में दिक्कत हो तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से मिलें।
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बच्चों में सुनने की जांच समय-समय पर कराएं।
क्यों जरूरी है जागरूकता?
WHO का कहना है कि सुनने की कई समस्याएं रोकथाम योग्य (Preventable) हैं। सही जानकारी, समय पर जांच और सावधानी से बड़ी संख्या में लोगों को स्थायी बहरापन से बचाया जा सकता है।
निष्कर्ष
विश्व श्रवण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सुनने की क्षमता अनमोल है। बदलती जीवनशैली और शोर भरे माहौल में कानों की देखभाल पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है। अगर अभी से सतर्कता बरती जाए, तो 2050 की भयावह तस्वीर को बदला जा सकता है।
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