UN Report 2025: भारत में नवजात मृत्यु दर में 70% गिरावट, वैश्विक स्तर पर मिली सराहना


 भारत के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। United Nations की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate) में करीब 70 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह उपलब्धि न सिर्फ भारत के लिए गर्व की बात है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल भी बन गई है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की सराहना Prime Minister’s Office (PMO) ने भी की है। पीएमओ ने सोशल मीडिया के जरिए इस सफलता को साझा करते हुए इसे सरकार की स्वास्थ्य नीतियों और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों का परिणाम बताया।

कैसे मिली यह सफलता?
भारत में नवजात मृत्यु दर में गिरावट के पीछे कई अहम पहलें और योजनाएं जिम्मेदार हैं। सबसे प्रमुख भूमिका बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता अभियानों की रही है।

1. संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी
सरकार की योजनाओं जैसे Janani Suraksha Yojana ने अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा दिया। इससे मां और नवजात दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

2. बेहतर नवजात देखभाल सुविधाएं
देशभर में विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (SNCU) की स्थापना की गई, जहां जन्म के बाद बच्चों को तुरंत मेडिकल सहायता मिलती है।

3. टीकाकरण और पोषण पर जोर
Mission Indradhanush जैसे अभियानों ने बच्चों के टीकाकरण को मजबूत किया। साथ ही, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के पोषण पर भी खास ध्यान दिया गया।

4. आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में ASHA workers और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

5. स्वच्छता और जागरूकता अभियान
Swachh Bharat Mission जैसे अभियानों ने साफ-सफाई और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई, जिससे संक्रमण से होने वाली मौतों में कमी आई।

वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान मजबूत
इस उपलब्धि के साथ भारत ने यह साबित कर दिया है कि सही नीतियों, मजबूत स्वास्थ्य ढांचे और सामूहिक प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं। नवजात मृत्यु दर में आई यह गिरावट न केवल लाखों बच्चों की जिंदगी बचाने में मददगार रही है, बल्कि देश को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों के करीब भी लेकर आई है।

निष्कर्ष
भारत की यह सफलता आने वाले समय में अन्य विकासशील देशों के लिए प्रेरणा बन सकती है। अगर इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो देश जल्द ही बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ