कई लोगों को सोते समय अजीब-अजीब हरकतें करने की आदत होती है। कुछ लोग नींद में बोलते हैं, चिल्लाते हैं या हाथ-पैर चलाने लगते हैं। कई बार लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह एक नींद से जुड़ी समस्या भी हो सकती है, जिसे REM Sleep Behavior Disorder कहा जाता है।
क्या होता है यह डिसऑर्डर?
नींद के दौरान हमारा शरीर कई चरणों से गुजरता है, जिनमें एक महत्वपूर्ण चरण Rapid Eye Movement Sleep (REM) होता है। इस चरण में इंसान सबसे ज्यादा सपने देखता है। सामान्य स्थिति में इस समय शरीर की मांसपेशियां लगभग स्थिर रहती हैं, जिससे हम सपनों के अनुसार शारीरिक गतिविधि नहीं करते।
लेकिन REM Sleep Behavior Disorder में यह प्रक्रिया सही तरीके से काम नहीं करती। इस वजह से व्यक्ति सपनों के दौरान हाथ-पैर चलाने लगता है, चिल्ला सकता है या कभी-कभी बिस्तर से उठकर चल भी सकता है।
इसके लक्षण क्या हैं?
इस समस्या से पीड़ित लोगों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे:
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सोते समय हाथ-पैर मारना या झटके देना
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नींद में चिल्लाना या जोर-जोर से बोलना
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डरावने सपनों के दौरान अचानक हरकत करना
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बिस्तर से गिर जाना या आसपास की चीजों से टकराना
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सुबह उठने पर सपनों को स्पष्ट रूप से याद होना
कई बार इस दौरान व्यक्ति खुद को या अपने पास सो रहे व्यक्ति को चोट भी पहुंचा सकता है।
क्यों होती है यह समस्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
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दिमाग से जुड़ी कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
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अत्यधिक तनाव या मानसिक दबाव
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कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट
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नींद की अनियमित आदतें
कई मामलों में यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखी जाती है।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से नींद में चिल्लाता है, हाथ-पैर चलाता है या बार-बार डरावने सपनों के दौरान हरकत करता है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में नींद विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी होता है।
कैसे किया जाता है इलाज?
REM Sleep Behavior Disorder का इलाज व्यक्ति की स्थिति और कारणों के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर दवाइयों, बेहतर नींद की आदतों और तनाव कम करने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा सोने का सुरक्षित वातावरण बनाना भी जरूरी होता है ताकि किसी तरह की चोट से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या की पहचान हो जाए तो इसे नियंत्रित करना संभव है। इसलिए नींद में होने वाली असामान्य गतिविधियों को नजरअंदाज करने के बजाय सही समय पर जांच कराना बेहतर होता है।
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