पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब China ने एक अहम कदम उठाया है। Iran और Israel के बीच बढ़ते संघर्ष तथा United States की सैन्य कार्रवाई के कारण पूरे क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी बीच बीजिंग ने अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई रणनीतिक पहल शुरू की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र
मौजूदा संकट का सबसे बड़ा असर Strait of Hormuz पर देखा जा रहा है। यह दुनिया का सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है। वैश्विक मानक माने जाने वाले Brent Crude का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
चीन ने उठाया रणनीतिक कदम
रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने क्षेत्र में अपने नागरिकों और कंपनियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। बीजिंग ने अपने जहाजों और ऊर्जा सप्लाई से जुड़े हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ाई है। साथ ही चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील भी की है।
चीन दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है, इसलिए पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर उसकी ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो तेल की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका असर दुनिया भर में महंगाई, ईंधन की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर पश्चिम एशिया के हालात और बड़ी शक्तियों की कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह संकट और गहराता है या बातचीत के जरिए हालात सामान्य हो पाते हैं।
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