इंडोनेशियाई अधिकारियों के मुताबिक मेटा की कंटेंट मॉडरेशन नीति धीमी और प्रभावहीन साबित हो रही है। सरकार का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाएं, भ्रामक पोस्ट और अवैध जुए से जुड़े विज्ञापन तेजी से फैल रहे हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
इसी वजह से सरकार ने कंपनी को सख्त कदम उठाने के लिए कहा है। यदि तय समय के भीतर इन समस्याओं को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इंडोनेशिया में कंपनी की सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
इस विवाद के बीच देश में एक नया कानून भी लागू किया गया है, जिसे पीपी ट्यूनस (PP Tunas) कहा जा रहा है। यह कानून मुख्य रूप से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। नए नियमों के अनुसार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग से जुड़े कई कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।
नए कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नाबालिग उपयोगकर्ताओं की पहचान और सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही बच्चों को हानिकारक कंटेंट, ऑनलाइन जुए और भ्रामक सूचनाओं से बचाने के लिए अतिरिक्त निगरानी तंत्र भी लागू करना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी और अवैध गतिविधियों को रोकना आज दुनिया भर की सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। इसी वजह से कई देश टेक कंपनियों पर सख्त नियम लागू कर रहे हैं।
इंडोनेशिया का यह कदम भी उसी दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि तकनीकी कंपनियों को केवल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाली गतिविधियों की जिम्मेदारी भी उठानी होगी।
यदि मेटा तय मानकों के अनुसार बदलाव नहीं करती है, तो आने वाले समय में इंडोनेशिया जैसे बड़े डिजिटल बाजार में उसके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं इस फैसले का असर अन्य सोशल मीडिया कंपनियों की नीतियों पर भी पड़ सकता है।
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