Kidney Cancer: क्यों होता है किडनी में कैंसर? पुरुष या महिलाओं में किसे ज्यादा खतरा?


 किडनी हमारे शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का अहम काम करती है। जब किडनी की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और अनियंत्रित विभाजन करने लगती हैं, तो यह स्थिति किडनी कैंसर कहलाती है। चिकित्सा भाषा में इसे रीनल सेल कार्सिनोमा (Renal Cell Carcinoma) भी कहा जाता है, जो किडनी कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है।

किडनी कैंसर क्यों होता है?

किडनी कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं है, लेकिन कई जोखिम कारक (Risk Factors) इसके विकास में भूमिका निभाते हैं:

1. धूम्रपान (Smoking)

सिगरेट पीने वालों में किडनी कैंसर का खतरा गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में अधिक पाया गया है।

2. मोटापा (Obesity)

अत्यधिक वजन शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे कैंसर का जोखिम बढ़ता है।

3. हाई ब्लड प्रेशर

उच्च रक्तचाप और उससे जुड़ी दवाएं भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

4. आनुवंशिक कारण (Genetic Factors)

यदि परिवार में किसी को किडनी कैंसर रहा है, तो खतरा बढ़ सकता है।

5. केमिकल एक्सपोजर

कुछ औद्योगिक रसायनों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से जोखिम बढ़ता है।

6. लंबे समय तक डायलिसिस

किडनी फेलियर के मरीज जो लंबे समय से डायलिसिस पर हैं, उनमें जोखिम ज्यादा हो सकता है।

पुरुष या महिला—किसे ज्यादा खतरा?

आंकड़ों के अनुसार, पुरुषों में किडनी कैंसर का खतरा महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों में धूम्रपान की अधिक दर, हाई ब्लड प्रेशर और लाइफस्टाइल फैक्टर्स इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं। हालांकि महिलाओं में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है, खासकर मोटापा और जीवनशैली में बदलाव के कारण।

किडनी कैंसर के लक्षण क्या हैं?

शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। लेकिन बीमारी बढ़ने पर ये संकेत मिल सकते हैं:

  • पेशाब में खून आना

  • कमर या पीठ के एक तरफ लगातार दर्द

  • बिना कारण वजन कम होना

  • थकान और कमजोरी

  • बुखार जो लंबे समय तक बना रहे

कैसे करें बचाव?

  • धूम्रपान से दूर रहें

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें

  • ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें

  • नियमित हेल्थ चेकअप कराएं

  • पर्याप्त पानी पिएं

निष्कर्ष

किडनी कैंसर किसी भी उम्र और लिंग में हो सकता है, लेकिन पुरुषों में इसका जोखिम थोड़ा ज्यादा पाया गया है। अच्छी बात यह है कि यदि समय पर पहचान हो जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और नियमित जांच कराते रहें।

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